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बीईओ पर सख्त डीईओ और अन्य बीईओ को अभयदान, बीईओ एम डी दीवान पर ठीकरा फोड़ कराया गया निलंबन…

जांजगीर-चांपा। जिले में शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की कॉउंसलिंग में गड़बड़ी मामले में बम्हनीडीह बीईओ एम डी दीवान को निलंबित कर दिया गया जबकि अन्य ब्लॉकों में भी खामियां रही जिसे सुधारा गया और कॉउंसलिंग कराया गया लेकिन डीईओ ने बम्हनीडीह बीईओ के खिलाफ ही कलेक्टर को प्रतिवेदन दिया। डीईओ ने अपने प्रतिवेदन में लिखा है कि व्याख्याता संजय देवांगन परीक्षा अवधि में है जिसे बीईओ ने गलत तरीके से अतिशेष किया है जिसे जिसे सुधारकर सूची जारी किया गया लेकिन जिले और संभाग की सूची में उसका नाम फिर से था। आखिर डीईओ ने जब बीईओ की गलती बताई तो उसे सुधारा क्यों नही गया। इस गलती के लिए डीईओ ने कलेक्टर को गुमराह कर प्रतिवेदन को कमिश्नर के पास भिजवाया और कमिश्नर ने आनन फानन में निलंबित भी कर दिया जिसके बाद से सवाल उठ रहे है। डीईओ ने आनन फानन में सूची बनवाईं सभी ब्लॉकों में कुछ न कुछ खमिया रही लेकिन डीईओ ने जानबूझ कर बीईओ बम्हनीडीह के खिलाफ प्रतिवेदन दिया।
बीईओ की सही सूची में फेरबदल फिर भी कार्रवाई
युक्तियुक्तकरण के तहत शिक्षको के अतिशेष सूची में डीईओ ने परिवीक्षा अवधि वाले शिक्षक को अतिशेष बताने का हवाला देकर बीईओ के खिलाफ जो प्रतिवेदन दिया गया है दरअसल बीईओ के सूची में शिक्षक संजय देवांगन का नाम ही नही था। बीईओ ने जो सूची पहले डीईओ को सौपी थी उस सूची में किसी अन्य शिक्षक का नाम था लेकिन सीईओ के पास उस शिक्षक ने आवेदन किया तब सीईओ ने उस शिक्षक का नाम काटकर संजय देवांगन का नाम जोड़ दिया। कॉउंसलिंग के दिन संजय देवांगन के परिवीक्षा अवधि की बात सामने आई जिसे डीईओ कह रहे है कि मेरे द्वारा सुधारकर नई सूची जारी की गई है । बीईओ की सूची पहले सही थी लेकिन बाद में जिले से ऐन वक्त पर फेरबदल किया गया। शिक्षको को दावा आपत्ति का समय नही मिला और कॉउंसलिंग करा दी गयी। अब सवाल यह उठता है कि जब बीईओ ने सूची सही दी थी बाद में सीईओ के बाद बदली गयी इसके बाद भी बिना जांच पड़ताल के बीईओ के खिलाफ डीईओ का प्रतिवेदन बीईओ एम डी दीवान के खिलाफ साजिश लग रही है। बीईओ एम डी दीवान द्वारा ऐसी कोई बड़ी गलती नही की गई हैजिसकी सजा निलंबन हो । जबकि अन्य ब्लॉकों में भी देर रात तक सूची में सुधार किया गया लेकिन डीईओ ने किसी भी अन्य बीईओ के खिलाफ कोई भी प्रतिवेदन नही दिया।
102 से अतिशेष 91 पर सवाल उठ रहा , डीईओ की मनमानी
डीईओ द्वारा अतिशेष के मामले में बड़ा खेल खेला गया।अतिशेष की जो सूची जारी की गई उसमें जिला पंचायत सीईओ का साइन है सूची में 102 लोंगो का नाम था लेकिन कॉउंसलिंग के समय 91 व्याख्याताओं का नाम अतिशेष में था। आखिर कॉउंसलिंग के समय बांकी 11 व्यख्याता कहा गया। डीईओ द्वारा बिना दावा आपत्ति मनमानी ढंग से किया गया लेकिन कलेक्टर द्वारा उनके खिलाफ कोई भी कार्रवाई नही की गई जिससे कई सवाल उठ रहे है। अब डीईओ के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी की जा रही है ।



