जिले में शिवरीनारायण और पामगढ़ के ग्राम धनगांव में करीब तीन सौ परिवार शिकारी समाज के निवासरत हैं। समाज के बुजुर्गो का कहना है कि पहले बिलासपुर जिले के अंतर्गत शिकारी समाज के लोग आदिवासी समाज में आते थे, लेकिन जब से जांजगीर-चांपा जिला बना है, तब से अब तक हम लोगो को किसी समाज के अंतर्गत नहीं रखा गया है। वर्तमान में हम शिकारी समाज के लोगों को जाति प्रमाण पत्र के अभाव में उनके बच्चों को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं युवाओं को रोजगार के लिए मिलने वाले आरक्षण के लाभ से वंचित रहना पड़ रहा है। कलेक्टोरेट पहुंचे समाज के लोगों का कहना है कि जिले में करीब 300 से अधिक परिवार निवास करते हैं। जांजगीर-चांपा जिला बनने के बाद किसी भी सदस्य के जाति प्रमाण पत्र नहीं बने, जबकि समाज के लोग शिवरीनारायण व पामगढ़ के धनगांव में सालों से निवास करते आ रहे हैं। जबकि बिलासपुर सहित अन्य जिले में अनुसूचित जनजाति में शामिल किया गया है। समाज के लोगो ने प्रशासन से इस समस्या का समाधान करने की मांग की है।
अलग-अलग जाति के बने है राशन कार्ड
शिकारी समाज के लोग बड़ी संख्या में अलग-अलग अपने ही समाज के बने राशन कार्ड को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। इसमें किसी का पिछड़ा वर्ग तो किसी का अनुसूचित जाति व किसी का अनुसूचित जनजाति का राशन कार्ड बना है।
“जिले में बंजारा, शिकारी, कोरवा, कोड़ाकू,मांझी, मंझवार समाज के लोगों के जाति प्रमाण पत्र बनने में आ रही तकनीकी दिक्कत के चलते इन परिवारों के बच्चों को शिक्षा व नौकरी में आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने प्रशासन से इस समस्या का समाधान करने की मांग की है।”
श्रीमती शेषराज हरबंश
विधायक पामगढ़