शारदीय नवरात्रि: प्रथम दिवस होती है मां शैलपुत्री की पूजा, जानें विधि और कथा…

शारदीय नवरात्रि: प्रथम दिवस होती है मां शैलपुत्री की पूजा, जानें विधि और कथा…
किया गया था। लेकिन उन्होंने अपनी बेटी सती और उनके पति भगवान शिव को आमंत्रण नहीं भेजा था। लेकिन देवी सती को यज्ञ में भाग लेने की तीव्र इच्छा थी। इस पर भगवान शिव ने उन्हें समझाया कि शायद उन्हें जानबूझकर इस यज्ञ में नहीं आमंत्रित किया गया है। भगवान शिव ने सती को यह बात समझाने का बहुत प्रयास किया, लेकिन देवी सती अपनी जिद पर अड़ी रहीं। ऐसे में भगवान शिव ने उन्हें आखिर में यज्ञ में जाने की अनुमति दे दी।
देवी सती जब अपने पिता के यज्ञ में पहुंची तो उन्होंने सती के साथ बुरा व्यवहार किया। सती की माता को छोड़कर किसी ने भी उनसे सम्मानपूर्वक वार्तालाप नहीं किया और सभी उनका मजाक उड़ाने लगे। यह अपमान सती के लिए असहनीय हो गया था। अपने पिता प्रजापति दक्ष द्वारा किए गए अपमान के चलते सती बहुत आहत हुईं। जब भगवान शंकर को यह बात पता चली तो वह बहुत क्रोधित हो गए और दक्ष ने भोलेनाथ का अपमान किया जो सती को बिल्कुल पसंद नहीं आया। उस समय देवी सती ने खुद को अग्नि में जला लिया।
भोलेनाथ ने क्रोधित होकर दक्ष के यज्ञ को नष्ट कर दिया। इसके बाद, सती ने अगले जन्म में शैलपुत्री के रूप जन्म लिया और वो हिमालय की पुत्री बनीं। मान्यता है कि शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में ही सती का अगला जन्म हुआ था। इसीलिए उन्हें शैलपुत्री कहा गया, जिनका विवाह भगवान शिव से हुआ और वो दोबारा उनकी पत्नी बन गईं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा-अर्चना करने से जातक की सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। वहीं, कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है।
मां शैलपुत्री की आरती
शैलपुत्री मां बैल पर सवार, करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रिय भवानी, तेरी महिमा किसी ने ना जानी।
पार्वती तू उमा कहलावे, जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू, दया करे धनवान करे तू।
सोमवार को शिव संग प्यारी, आरती तेरी जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो, सगरे दुख तकलीफ मिला दो।
घी का सुंदर दीप जला के, गोला गरी का भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं, प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।
जय गिरिराज किशोरी अम्बे, शिव मुख चंद्र चकोरी अम्बे।
मनोकामना पूर्ण कर दो, भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।
जोर से बोलो जय माता दी, सारे बोले जय माता दी।



