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नदियों के संरक्षण वाली कमेटी से हटाए जाएंगे सेक्रेट्री हाईकोर्ट बोला-विशेषज्ञों को करें शामिल, शासन का जवाब-15 दिन में चिह्नित होंगे उद्गम स्थल, डिस्प्ले बोर्ड भी लगेंगे

बिलासपुर, 17 मार्च : बिलासपुर छत्तीसगढ़ की अरपा समेत 11 प्रमुख नदियों के संरक्षण-संवर्धन के लिए राज्य सरकार की उच्च स्तरीय कमेटी में अब सचिवों को जगह नहीं मिलेगी। उनकी जगह कमेटी में विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल ने कमेटी पर सवाल उठाते हुए सचिवों को हटाकर विशेषज्ञों को शामिल करने के आदेश दिए हैं।

दूसरी तरफ कमेटी गठित होने के बाद शासन ने सोमवार को शपथ पत्र देकर बताया मुख्य सचिव विकास शील खुद इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। सभी जिलों के कलेक्टर्स से कहा गया है कि 15 दिनों के भीतर नदियों के उद्गम स्थलों का सीमांकन कर वहां डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएं। सभी कलेक्टरों को उद्गम स्थलों के भू-अभिलेख और जियो-टैग्ड तस्वीरें शासन को भेजनी होंगी।

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दरअसल, अरपा के उद्गम स्थल के साथ नदी के संरक्षण और संवर्धन को लेकर हाईकोर्ट में अलग-अलग जनहित याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। इसमें नदियों के प्राकृतिक प्रवाह क्षेत्र के संरक्षण और संवर्धन को लेकर हाईकोर्ट ने भी समय-समय पर दिशानिर्देश जारी किए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने जनहित याचिकाओं में प्रदेश की अन्य नदियों को शामिल कर शासन से जानकारी मांगी। 20 जनवरी को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने नदियों के उद्गम स्थल और संरक्षण को लेकर कमेटी बनाने के आदेश दिए थे, जिसके पालन में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक हाई-पावर कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें वित्त, जल संसाधन और वन विभाग समेत 7 विभागों के सचिवों को शामिल किया गया है।

हाईकोर्ट ने कमेटी में सचिवों को शामिल करने पर उठाए सवाल
इस मामले की सुनवाई के दौरान शासन ने शपथ पत्र में बताया कि कमेटी का गठन कर दिया गया है, जिसमें सचिव स्तर के अफसरों को शामिल किया गया है। इस पर हाईकोर्ट ने समिति में विशेषज्ञ शामिल नहीं करने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने विभाग के सचिवों की जगह विशेषज्ञों को शामिल करने पर पुनर्विचार किया जाए।

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जानिए…इन 11 नदियों की बदलेगी सूरत
राज्य सरकार ने बताया कि अरपा, महानदी, शिवनाथ, हसदेव, तांदुला, पैरी, मांड, केलो, सोन, तिपान और लीलगर नदी के उद्गम को संवारा- सहेजा जाएगा। नदियों पुनरुद्धार के लिए विभाग स्तर पर विशेषज्ञों का एक समर्पित सेल बनाया जाएगा। नदियों के उद्गम स्थलों के संरक्षण के लिए साइंटिफिक सर्वे कराकर डीपीआर तैयार किया जाएगा।

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ट्रीटमेंट के बाद ही गिरेगा नाले-नालियों का पानी
इसके साथ ही कहा गया कि शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों का गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट के नदियों में नहीं गिरेगा। उद्गम स्थलों को न केवल संरक्षित किया जाएगा, बल्कि उन्हें आस्था और पर्यटन के केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए विभाग अपने बजट के अलावा डीएमएफ, मनरेगा और 15वें वित्त आयोग की राशि का उपयोग कर सकेंगे।

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8 सदस्यीय समिति में सीएस समेत 7 सचिव
समिति के अध्यक्ष मुख्य सचिव होंगे, इसके साथ ही वित्त, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन, वन एवं जलवायु परिवर्तन, नगरीय प्रशासन एवं विकास और खनिज संसाधन विभाग के सचिव सदस्य होंगे। वहीं, छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, दुर्ग के पूर्व कुलपति प्रो. एमके. वर्मा को विशेषज्ञ सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है।

 

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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