CGPSC Scam ED Investigation: अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों के बीच खुला साठगांठ का राज, 12 लोगों को ED का बुलावा

रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) से जुड़े कथित पर्चा लीक और चयन अनियमितता मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच का दायरा लगातार विस्तृत होता जा रहा है। जांच एजेंसी ने पूर्व मुख्यमंत्री के तत्कालीन ओएसडी और वर्तमान में बलरामपुर के अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया है। फिलहाल रिमांड पर चल रहे चेतन बोरघरिया से कथित आर्थिक लेन-देन और वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में कड़ाई से पूछताछ की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि परीक्षा में पर्चा उपलब्ध कराने और अनुचित तरीके से चयन कराने के नाम पर वसूले गए करीब 3.2 करोड़ रुपये में से कितनी राशि चेतन बोरघरिया तक पहुंची। इसके साथ ही ईडी इस पहलू की भी पड़ताल कर रही है कि यदि रकम उनके पास आई, तो उसे आगे किन प्रभावशाली व्यक्तियों तक पहुंचाया गया। मामले में विकास चंद्राकर और उत्कर्ष चंद्राकर के जरिए रकम देने का आरोप है, जिसके आधार पर अभ्यर्थियों समेत करीब 12 लोगों को पूछताछ के लिए तलब किया गया है।
इस कार्रवाई से पहले ईडी की टीम ने धमतरी स्थित चेतन बोरघरिया के पैतृक निवास पर व्यापक छापेमारी की थी, जहां से महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए थे। जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से प्राप्त प्राथमिक इनपुट और अपनी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तालमेल से आगे की कार्रवाई कर रही है। वर्ष 2019 से 2023 के बीच के कॉल डिटेल रिकॉर्ड और चैट बैकअप से भी पैसे के लेन-देन, पर्चा लीक और इंटरव्यू में मदद से जुड़े अहम सुराग मिले हैं।
दूसरी ओर, ईडी ने मामले के अन्य मुख्य आरोपियों की संपत्तियों का ब्योरा जुटाकर उन्हें अटैच करने के लिए अदालत में आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन संदिग्धों में कारोबारी श्रवण कुमार गोयल, सेवानिवृत्त आईएएस टामन सिंह सोनवानी, जीवन किशोर ध्रुव, आरती वासनिक और ललित गणवीर शामिल हैं। एजेंसी का दावा है कि ये संपत्तियां अपराध की कमाई से अर्जित की गई हैं। फिलहाल ईडी डिजिटल साक्ष्यों, वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के बयानों का मिलान कर पूरी साजिश की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।



