खुन्नस का निलंबन, संघ ने लिया संज्ञान तो यू टर्न लिए डीएफओ मनेंद्रगढ़, किया निलंबन निरस्त पूर्व संसदीय सचिव के परिवार से ताल्लुक रखते हैं वन रक्षक गजाधर सिंह पावले…

खुन्नस का निलंबन, संघ ने लिया संज्ञान तो यू टर्न लिए डीएफओ मनेंद्रगढ़, किया निलंबन निरस्त
पूर्व संसदीय सचिव के परिवार से ताल्लुक रखते हैं वन रक्षक गजाधर सिंह पावले
एमसीबी। मनेंद्रगढ़ वन मंडल के डीएफओ की फिर एक वाहियात हरकत आई सामने। योजनाबद्ध तरीके से रविवार को किया आकस्मिक दौरा, रोजमर्रा की सामग्री बावत गए वन रक्षक को बेवजह का वजह बता किया निलंबित,एक्शन में आया वन कर्मचारी संघ तो 03 जुलाई 23 के निलंबन आदेश को 8 दिनों में 11 जुलाई 23 को किया निरस्त,जब नही भुना पाए पूर्व संसदीय सचिव के परिवार वन रक्षक से खुन्नस तो पदस्थ स्थान से 80 किलो मीटर दूर किया बहाल।
खुन्नस की कार्यवाई कैसे
मनेंद्रगढ़ वन मंडल के डी एफ ओ द्वारा फॉरेस्ट गार्ड पर बतौर खुन्नस निलंबन की कार्यवाई कैसे होती है पुख्ता जरा गौर करें। गजाधर सिंह पावले वन रक्षक जो की मनेंद्रगढ़ वन परिक्षेत्र के रतौरा सर्किल पश्चिम में पदस्थ थे। तो डीएफओ के दौरे की सूचना दी जाती है। 02 जुलाई दिन रविवार को। दौरे से महज आधा घंटे पहले सूचना दी गई। सोंचनीय विषय है की डीएफओ की हिटलर शाही इस कदर हावी दिखी की रात दिन बीहड़ों में सेवा देने वाले अपने ही अधीनस्थ कर्मचारी को जरा सा रियायत नहीं दे सके। गजाधर सिंह दौरा दिवस की सुबह दौरे की जानकारी मिलने से पहले अपने रोजमर्रा की सामग्री के लाने हेतु कुछ घंटे के लिए निकले हुए थे। डीएफओ दौरे पर आए और जंगल में अतिक्रमण,अवैध कटाई और आवर्ती चराई को मुद्दा बनाते हुए वन रक्षक गजाधर सिंह को बिना स्पष्टीकरण दिए सीधे तौर पर दूसरे दिन 3 जुलाई को साम 7 बजे निलंबन आदेश निकाल दिए। मनेंद्रगढ़ डी एफ ओ को एक वन रक्षक से इतनी चिढ़ या खुन्नस थी की एक डी एफ ओ जैसे अधिकारी के कुर्सी में बैठे व्यक्ति को निलंबन आदेश की कई गलतियां भी नहीं दिखीं और 2/7/22 को दौरा दिखाये और 3/7/23 एक साल बाद निलंबित करते हैं। अगर इसे टाइपिंग मिस्टेक कहें तो इतनी भी जल्दबाजी क्या थी की गलतियों को देखा नही गया और आनन फानन में संबंधित सहित उच्चाधिकारियों तक उक्त पत्र को भेज दिया गया।आपको बता दें की जिन बिंदुओं को कार्यवाई का आधार बनाया गया था। वह समस्या स्थानीय स्तर पर कई रेंजों में बड़े पैमाने पर है और उस पर कार्रवाई जनाब डीएफओ मनेंद्रगढ़ के द्वारा कभी नहीं की गई है। और फिर भी इसे आधार मान भी लिया जाए तो क्या डीएफओ द्वारा संबंधित को कारण बताओ नोटिस जो पहली प्रक्रिया होती है को दिया गया। नही दिया है बल्कि सीधे निपटा दिया गया। निलंबन अवधि के दौरान गजाधर सिंह वन रक्षक का कार्य क्षेत्र केल्हारी तय किया गया। जब कि गजाधर सिंह पावले का समूचा कार्यकाल बेहद मेहनती और जिम्मेदारी पूर्वक रहा है और जो बाते कहकर इन्हे निलंबित किया गया था की इनके कार्य क्षेत्र में कटाई हुई है और अतिक्रमण किया गया है तो ये दोनो बाते गलत है कोई भी नया अतिक्रमण नही था सभी के पास वनाधिकार पट्टा है और आबंटित रकबे में ही हैं साथ ही अवैध कटाई नही थी बल्कि कई साल पुराने दो आंवले के सूखे पेड़ों को पहले काटा गया था वह भी वनाधिकार पट्टा रकबे में है।
एक आदिवासी वर्ग के वन रक्षक पर प्रताड़ना की हदें पार, घर पर रात नौ बजे कराया नोटिस चस्पा
आपको अवगत करा दें की गजाधर सिंह पावले जो की पूर्व भाजपा की विधायक और संसदीय सचिव चंपा देवी पावले के घर और परिवार से हैं को प्रताड़ित करने का कार्य डेढ़ साल से किया जा रहा था एक वन रक्षक को चार चार बीट की जिम्मेदारी देकर भी जब डी एफ ओ की खुन्नस पूरी नहीं हुई तो रतौरा पश्चिम के बाद नारायणपुर बीट का अतिरिक्त प्रभार लेने दबाव बनाया गया जो की उनके मूल पदस्थ बिट से 60 किलोमीटर दूर और उल्टी दिशा में स्थित है। गजाधर सिंह पावले एक सीधे साधे सरल प्रवृति के इंसान हैं जो अपना हमेशा से ईमानदारी पूर्वकअपने पदीय दायित्वों का निर्वहन करते हुए अपने बच्चों की पढ़ाई लिखाई सहित अपने बूढ़ी मां की देखरेख भी करते हैं। जिस कारण उन्हें 60 किलोमीटर की उल्टी दिशा के परिधि में कार्य करना संभव नहीं लगा जिस कारण उन्होंने नारायणपुर बीट का अतिरिक्त प्रभार लेने से मना कर दिया जिसके बाद डी एफ ओ को शायद खुन्नस भुनाने का अवसर भी मिल गया और दूसरे दिन ही डीएफओ मनेंद्रगढ़ ने उनके रतौरा पश्चिम का दौरा किया और खुन्नस साधते हुए उन्हें योजनाबद्ध तरीके से निलंबित कर दिया। आप सभी को जानकर आश्चर्य होगा की मनेंद्रगढ़ वन मंडल के डी एफ ओ द्वारा निलंबन आदेश को बतौर सूचना संबंधित पत्राचार के संसाधनों से हटकर एक आदिवासी समाज के वन रक्षक के ग्राम मुख्तियारपारा पैतृक घर पर रात के नौ बजे नोटिस चस्पा कराया गया। जो की एक आदिवासी वर्ग के कर्मचारी की घोर बेइज्जती और अपमानित करने की श्रेणी में आता है। वन रक्षक गजाधर सिंह पर होते अकारण अत्याचार पर जब वन कर्मचारी संघ ने डीएफओ को घेरा तो डीएफओ ने आनन फानन में अपनी करतूत को छुपाते हुए वन रक्षक के निलंबन को निरस्त कर दिया। पर इसके बाद भी डी एफ ओ साहब का राजनीतिक दिमागी कीड़ा शांत नहीं हुआ तो हरकत बाज़ डी एफ ओ अपनी खुन्नस की मंशा पूरी करने के लिए वन रक्षक को उनके पदस्थ स्थान से तीसरे सब डिवीजन 80 किलोमीटर दूर बहाली दे दिए।जो प्रताड़ना की सारी हदों को पार करने जैसा प्रतीत हो रहा है। सूत्रों से जो बात सामने आई है उसके आधार पर कहा जा सकता है की डीएफओ मनेंद्रगढ़ डीएफओ गिरी छोड़कर राजनीति करने पर उतारू हो चुके हैं और क्षेत्र के पूर्व नेताओं के परिवार जनों को पीड़ित कर अपने करीबी संरक्षक नेताओं को खुश करके अपनी कुर्सी बरकरार रखना चाह रहे हैं वरना ऐसी वाहियात हरकत कोई भी डी एफ ओ जैसा अधिकारी कभी नहीं करता। बहरहाल डी एफ ओ मनेंद्रगढ़ की ऐसी गतिविधियां हाल ही में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर संदिग्ध पाईं जा सकती हैं इसलिए चुनाव आयोग को भी इन पर संज्ञान लेना चाहिए।



