छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पा
करोड़ों की शासकीय भूमि का हुआ बिक्री नामांतरण, जंगल की जमीन के बिक्री मामले ने पकड़ा तूल, सवालों के घेरे में जिम्मेदार…
अपर कलेक्टर से शिकायत के बाद भी दोषियों के विरुद्ध जांच कार्यवाही शून्य।

सक्ति। दरअसल पूरा मामला भोथिया तहसील कार्यालय अंतर्गत ग्राम पंचायत झालरोंदा का है जहां बड़े झाड़ के जंगल के शासकीय भूमि को ग्रामीणों के नाम से नामंतरण कर बिक्री कर करोड़ों का बंदरबाट करने का शिकायत सक्ति अपर कलेक्टर से किया गया है। उक्त शिकायत में झालरौंदा पंचायत में स्थित खसरा क्रमांक 34 का रकबा लगभग 36 एकड़ (कुल बटांकन सहित) जो कि वर्ष 2014-15 से 2018-19 तक के खसरा पांचसाला विवरण के अनुसार खसरा क्रमांक 34/1 बड़े झाड का जंगल (शासकीय भूमि) व अन्य 31 भाग पट्टे पर ग्रामीणों को दिया जाना प्रतीत व सिद्ध होता है। जिसे बिना कोई विशेष परिस्थिति व बिना कलेक्टर आदेश के किसी भी कीमत पर खरीदी बिक्री व रजिस्ट्री नही किया जा सकता है। जबकि उन 31 किसानों में से 10 किसानों (ग्रामीणों) द्वारा खुद के नाम पर उक्त भूमि के दर्ज होने का गलत फायदा उठाते हुए अधिक पैसा कमाने के लोभ में क्रेता संकेत मित्तल मेसर्स मॉ नारायणी मिनरल्स चाम्पा को अपनी भूमि बेच दी गई है, जबकि यदि वास्तव में खसरा नं. 34 की भूमि इन किसानों को पट्टे पर दी गई थी तो उनको सिर्फ उस भूमि पर खेती-किसानी ही करते हुए जीवन-यापन करने के लिए दी गई होगी। इसके बावजूद इन किसानों ने अपनी भूमि अधिक रकम के लालच में फर्जी तरीके से बेच दी है। आपको बता दे जब इस गड़बड़ घोटाले की शिकवा शिकायत वर्तमान में फिर एक बार जिला प्रशासन तक पहुंची तो मामला जिले में तूल पकड़ने लगा और जिले के उच्च अधिकारियों द्वारा मामले की जांच के लिए आदेशित कर एक सदस्यीय टीम को मामले की हकीत जानने के लिए हल्का पटवारी के द्वारा जांच कराया गया जहां शिकायतकर्ता का शिकायत के आधार पर सही पाया गया एवं शासकीय भूमि का करीदी बिक्री ग्रामीणों द्वारा करना पाया। वही जब इस मामले के संबंध में स्थनीय वर्तमान तहसीलदार लक्ष्मी कांत कोरी (भोथिया) से जानकारी ली गई तो इस मामले के संबंध जो भी फाइल है उससे जिला प्रशासन को सौप देने की बात कहते हुए वही पता कर लेने की बात कहते हुए पल्लझाड़ते नजर आए। जिससे यह भी अंदाजा लगाया जा रहा है। शिकायतकर्ता की माने तो अगर इस मामले में उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की जाए तो कुछ जिम्मेदार भी जांच के घेरे में आएंगे।
करोड़ों की कूट रचना कर शासकीय भूमि की खरीदी बिक्री
आपको बता दे यह मामला जिला का सबसे बड़ा जमीन घोटाला है। जिले के एकमात्र वनपरिक्षेत्र छितापंड़रिया-झालरौन्दा-खम्हरि या, है यहां बेशकीमती खनिजसम्पदा से क्षेत्र परिपूर्ण है। यहाँ के शासकीय भूमि को भूमाफियाओं की नजर लग चुकी है जिनके द्वारा क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और राजस्व विभाग के कर्मचारियों से मिलीभगत कर सैंकड़ों एकड़ शासकीय जमीन की खरीदी बिक्री कर करोड़ों का वारा-न्यारा करते हुए बंदरबांट किया गया है जिसकी शिकायत अनेकों बार की जा चुकी है लेकिन शायद इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों से लेकर जाँच अधिकारियों की जेबें भी गर्म कर दी जा रही हैँ। जिससे मामले को लेकर अब तक किसी प्रकार की न तो जिला प्रशासन द्वारा कार्यवाही की गई नही शासकीय भूमि की रजिस्ट्री निरस्त नहीं की गई है। जबकि जाँच के दौरान शिकायतकर्ता की शिकायत सही पाई गई है।
अगले पांच साल में नहीं बचेगी कोई शासकीय जमीन
झालरौंदा गाँव में यह चर्चा आम हो चली है कि जिस गति से झालरौंदा और आसपास की जमीनों की बिक्री हो रही है और इतने शिकायतों के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं होने से अगले पांच साल में सभी सरकारी जमीन खदान मालिकों के नाम होने से कोई नहीं रोक सकता है।
कार्यवाही हो रही है एस डी एम कार्यालय भेज दिए है मामले में कार्यवाही करने के लिए।
अपर कलेक्टर सक्ति
बीरेंद्र लकड़ा



