राजस्व अधिकारी ही भूमाफियों के लिए नक्शा और खसरा बटांकन कर रहे है फिर भी उन्हें अवैध प्लाटिंग की जानकारी नहीं ?…

अवैध प्लाटिंग पर नाम मात्र की कार्यवाही, हकीकत कुछ और ही बयां कर रही
विष्णु के सुशासन सरकार में भी भूमाफियों का जलवा रहेगा?
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों और किसानों को भूमाफिया लुट रहे है। भूमाफिया किसानों से सस्ते दर पर जमीन खरीदकर किसान को चन्द पैसे देकर उनसे मुख्तियार नामा लेकर बिना रजिस्ट्री पंजीयन के ही खेतों का टुकड़ों में प्लाट काटकर अवैध कारोबार कर रहे है। इधर आम नागरिक भूमाफियों के झांसे में आकर खेतिहर जमीन के अवैध प्लाट को खरीद रहे है। जिन्हें आगे जाकर सड़क, पानी, बिजली की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। भूमाफिया इतने शातिर है कि जिस किसान से खेत खरीदते है उनकी खेत को अपने नाम पर रजिस्ट्री भी नही कराते है ताकि राजस्व रिकॉर्ड में खेत किसान के नाम पर ही दर्ज रहे। ऐसा इसलिए करते है ताकि आने वाले समय में कार्यवाही से भी बचा जा सके। अपने मंसूबों पर कामयाब होने के लिए भूमाफिया राजस्व अधिकारियों को रिश्वत का बड़ा रकम देकर खुश रखते है क्योंकि विधि विरुद्ध नक्शा और खसरा जो बटांकन कराना होता है। नामांतरण और डायवर्शन जो कराना होता है।
तहसील न्यायालय को भ्रष्ट राजस्व अधिकारियों ने न्यायालय नही बल्कि रिश्वतख़ोरी का अड्डा बना लिया, जहां भूमाफियों के काम फटाफट हो गए। आम नागरिकों का काम धीरे- धीरे नियमबद्ध होता रहता है। भूमाफियों के लिए मानो तो कोई नियम क़ानून ही नहीं है वे जैसा कहते है वैसा राजस्व अधिकारी करते रहते है? तभी तो राजस्व अधिकारी अवैध प्लाटिंग करने वाले भूमाफियों के खसरा क्रमांक और नक्शा का बटांकन आदेश किए है खाता विभाजन किए है। नामांतरण किए है। विभक्त खसरा क्रमांक को भूमि का बिना ले आउट पंजीकरण के कच्चे में डायवर्शन किए है। जिसका खामियाजा आज आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। कच्चा प्लाटिंग के अवैध कारोबार में भूमाफियों के साथ – साथ राजस्व अधिकारी भी बराबर के दोषी है। सत्ता परिवर्तन के बाद लगातार कार्यवाही से ऐसा लगा अब भूमाफियों का बिलासपुर से सफाया हो जाएगा। लेकिन रास्ता खोदो वाली चंद कार्यवाही के बाद नगर निगम के जेसीबी का पहिया थम गया? राजस्व अधिकारियों का कलम रुक गया? और एक बार फिर न्यायधानी में भूमाफिया बड़े जोरशोर से चीख चीख कर प्रचार प्रसार कर अवैध प्लाट बेच रहे है। जिस पर कार्यवाही नही होना यह स्पष्ट कर रहा है कि एक बार फिर न्यायधानी में अवैध प्लाटिंग का अवैध कारोबार जोर पकड़ेगा। देखना होगा कि भ्रष्ट अधिकारी भूमाफियों से रिश्वत लेकर अवैध प्लाट के अवैध कारोबार पर और कब तक पर्दा डालते रहेंगे? कुछ भ्रष्ट नेता भी इन्हें संरक्षण देने के लिए बतौर कमीशन कुछ प्लाट की रजिस्ट्री कब तक कराते रहेंगे?














