ग्राम कुटरा में गणतंत्र दिवस समारोह : साहसिक फैसला ही बदलाव का आधार – पुर्व प्राचार्य साहू

जांजगीर-चांपा। बदलाव सामूहिक प्रयास से आता है, लेकिन जो विपरीत परिस्थितियों में साहसिक फैसला लेकर लोगों को सही मार्ग दिखाता है, वही सच्चा नायक कहलाता है। ये बातें ग्राम कुटरा के रामसरकार शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल के प्रांगण में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह को संबोधित करते हुए विद्यालय के सेवानिवृत्त एवं संस्थापक प्राचार्य एल.आर. साहू ने मुख्यअतिथि के रूप में कही। अपने कार्यकाल को स्मरण करते हुए श्री साहू ने बताया कि वर्ष 2008 में जब उन्हें विद्यालय का प्रथम प्राचार्य नियुक्त किया गया, तब हाईस्कूल का संचालन पूर्व माध्यमिक शाला के पुराने भवन में किया जाता था। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता था और कई आवश्यक व्यवस्थाएं उन्हें अपने निजी व्यय से करनी पड़ीं। उन्होंने कहा कि सार्थक प्रयासों के बावजूद लगभग छह वर्षों तक विद्यालय को स्थायी भवन उपलब्ध नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि इसी दौरान ग्रामवासियों के अनुरोध पर ग्राम के प्रतिष्ठित मालगुजार परिवार के सदस्य राघवेन्द्र पाण्डेय द्वारा हाईस्कूल की नींव रखी गई, जो आगे चलकर ग्राम कुटरा के शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास में मील का पत्थर सिद्ध हुई। समारोह में सेवानिवृत्त संस्थापक प्राचार्य एल.आर. साहू को उनके विशिष्ट योगदान के लिए विद्यालय एवं ग्राम पंचायत द्वारा शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। साथ ही विद्यालय में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को मोमेंटो एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। वहीं प्राचार्य संदीप श्रीवास्तव के सौजन्य से शिक्षा, खेल एवं अन्य गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को ब्रांडेड स्कूल बैग, आकर्षक मोमेंटो, पेन एवं प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया गया। इस अवसर पर देवी निर्मलकर, गुलाबचंद्र पाण्डेय, धनेन्द्र कश्यप, राजू कश्यप सहित गांव के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।
हाईस्कूल की नींव साहसिक फैसला
रामसरकार शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल के प्रथम और पुर्व प्राचार्य आर एल साहु ने कहा कि वर्ष 2008 में कुटरा में हाईस्कूल की स्थापना तो की गई थी, लेकिन अतिक्रमण के कारण छह वर्ष बाद भी स्कूल भवन नही बन पा रहा था। हाईस्कूल को भड़ेसर मोड़ में स्थांतरित करने का प्रयास किया गया, तब राघवेन्द्र पाण्डेय ने साहसिक पहल किया और अपने पैतृक निजी तालाब से लगी हुई भुमि में हाईस्कूल की नींव रखी, जो उन्नयन होकर अब हायर सेकेण्डरी स्कूल है।



