रायपुर भारतमाला घोटाला: ED का ताबड़तोड़ एक्शन! जमीन मुआवजे में 500 करोड़ की धांधली उजागर

रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भारतमाला परियोजना से जुड़े बहुचर्चित भूमि मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। जमीन कारोबारी गोपाल गांधी समेत उनके सहयोगियों के आधा दर्जन से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। सुबह तड़के पहुंची 13 अधिकारियों की टीम अभनपुर स्थित आवास और कार्यालय में दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है।
500 करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी का आरोप
जांच एजेंसियों के मुताबिक रायपुर-विशाखापत्तनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान करीब 500 करोड़ रुपये से अधिक की धांधली सामने आई है। इस घोटाले में सरकारी मुआवजा प्रक्रिया का दुरुपयोग कर भारी आर्थिक अनियमितताएं की गईं।
कैसे खेला गया मुआवजा घोटाला
जांच में खुलासा हुआ है कि कृषि भूमि को बैकडेट में गैर-कृषि घोषित कर उसका मुआवजा कई गुना बढ़ा दिया गया। राजस्व विभाग के अधिकारियों—जैसे एसडीएम, तहसीलदार और पटवारी—ने कथित तौर पर जमीन दलालों के साथ मिलकर यह खेल रचा।
एक ही खसरे की जमीन को कागजों में छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर मुआवजा दिलाया गया, जिससे कुल रकम कई गुना बढ़ गई।
पहले भी हुई बड़ी कार्रवाई
इस मामले में ईडी और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) पहले भी कई ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है। करोड़ों की संपत्तियां अटैच की गई हैं और 40 लाख रुपये से अधिक कैश जब्त किया गया है।
तत्कालीन SDO निर्भय साहू सहित कई अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
चार्जशीट और आगे की जांच
EOW ने इस घोटाले में 10 लोगों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की है, जिनमें सरकारी अधिकारी और जमीन दलाल शामिल हैं।ईडी अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है, जिसमें फर्जी दस्तावेज, बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल ट्रेल खंगाले जा रहे हैं।
परियोजना की साख पर सवाल
भारत सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना में इस तरह की गड़बड़ी सामने आने से इसकी पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे घोटाले विकास परियोजनाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकते हैं।



