Reg No. CG-06-0026209
IMG-20250604-WA0015-1
IMG-20250604-WA0014-1
WhatsApp Image 2026-06-25 at 17.56.31 (1)
WhatsApp Image 2026-06-25 at 17.55.51 (1)
b5ce874a-8a3f-482a-9d4a-eaf6ab18dc7e
छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पादेश- विदेशराज्य एवं शहररायपुर

प्रधानमंत्री मोदी के सपनों को लगा ग्रहण, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा DMF…

कोरबा। खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड (DMF) छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और राजनीतिक स्वार्थ का शिकार हो गई है। योजना का उद्देश्य खनन प्रभावित लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना था, लेकिन यह नेताओं और नौकरशाहों की ‘पॉकेट मनी’ बनकर रह गया है।

कोरबा जिले में DMF घोटाले के तहत पूर्व कलेक्टर रानू साहू (IAS) सहित छह आरोपियों को हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा किया गया। रानू साहू पर कोल स्कैम और DMF में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप है। जांच एजेंसियों ED और EOW-ACB ने खुलासा किया कि टेंडर आवंटन के नाम पर 25 से 40 प्रतिशत तक कमीशन लिया गया, और यह रकम एडवांस में वसूली जाती थी। इस गोरखधंधे में अफसरों के साथ राजनीतिक दलों से जुड़े नेता और बिचौलिए भी शामिल थे।

See also  जिले में अवैध शराब निर्माण और भंडारण के विरुद्ध की गई कार्रवाई...

जांच में सामने आया कि रानू साहू की करीबी अधिकारी माया वारियर सहित कई आरोपियों की 23.79 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की गई, जिसमें 21.47 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति DMF की ब्लैक मनी से खरीदी गई थी। इसके अलावा 76.50 लाख रुपये नकद, फर्जी कंपनियों से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और 8 बैंक खाते भी जब्त किए गए।

योजना का उद्देश्य और हकीकत
वर्ष 2015 में शुरू हुई DMF योजना का मकसद खनन प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में विकास कार्य करना था। लेकिन कोरबा सहित प्रदेश के अन्य जिलों में फंड का इस्तेमाल उन क्षेत्रों में भी किया गया, जिनका खनन से कोई संबंध नहीं था। DMF के संचालन में पारदर्शिता पूरी तरह नदारद है—2018 के बाद से राशि और कार्यों का विवरण वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया जा रहा। सामाजिक ऑडिट का प्रावधान होने के बावजूद अब तक ऑडिट नहीं हुआ है।

See also  प्रेशर हार्न, बुलेट मोडीफाइड साइलेंसर में तेज आवाज वाहन चलाने वाले वाहन चालकों के विरूद्ध मोटर अधिनियम के तहत् की गई कार्यवाही...

कलेक्टरों के ‘स्पेशल प्रोजेक्ट’
कोरबा में पूर्व कलेक्टर किरण कौशल ने DMF से “सोन चिरैया” योजना के तहत स्कूली छात्राओं को अंडे वितरित किए, जिनकी गुणवत्ता पर सवाल उठे। वर्तमान कलेक्टर अजीत वसंत ने “गरम नाश्ता” योजना शुरू की है, जिसके तहत जुलाई से पूरे जिले के स्कूलों में नाश्ता वितरण किया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या केंद्र सरकार की योजनाएं कमतर हैं, जो अतिरिक्त आहार पर DMF का पैसा खर्च किया जा रहा है?

Advertisment

CBI जांच की मांग
विशेषज्ञों का मानना है कि दंतेवाड़ा और कोरबा जिलों के DMF फंड की CBI से जांच कराई जाए, तो करोड़ों के घोटालों की हकीकत सामने आ जाएगी। फिलहाल, यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री की यह महत्वाकांक्षी योजना भ्रष्टाचार के दलदल में फंस चुकी है, और राज्य का कोई भी तंत्र इस पर कार्रवाई के लिए गंभीर नहीं दिख रहा।

See also  RAIPUR:बढ़ई की मदद से डॉक्टरों ने मजदूर की जान बचाई...

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!