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PM मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फ्रांस में होगी मुलाकात, व्हाइट हाउस ने क्या बताया?

वाशिंगटन,14जून : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 17 जून को शाम 6:15 बजे (भारतीय समयानुसार) फ्रांस में आयोजित G7 समिट के इतर मुलाकात करेंगे. व्हाइट हाउस के एक सीनियर अधिकारी ने शनिवार को इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों नेताओं के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील पर चल रही बातचीत बैठक का प्रमुख एजेंडा होगी. फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के बाद राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनकी यह पहली आमने-सामने की मुलाकात होगी.

प्रधानमंत्री मोदी 16-17 जून को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर G7 समिट में हिस्सा लेंगे. इस दौरान वह G7 देशों के नेताओं, साझेदार देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ वैश्विक साझेदारी, सतत आर्थिक विकास और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के सुरक्षित उपयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे. सूत्रों के मुताबिक भारत और अमेरिका के बीच कई महीनों से प्रस्तावित ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है और यह विषय मोदी-ट्रंप बैठक में प्रमुखता से उठाया जाएगा.

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व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘इस वर्ष की शुरुआत में दोनों देशों ने ट्रेड डील के जॉइंट फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए थे और इसे अंतिम रूप देने के लिए पिछले एक साल से गहन वार्ताएं चल रही हैं.’ उन्होंने कहा, ‘भारत और अमेरिका स्वाभाविक आर्थिक साझेदार हैं. ऊर्जा, औद्योगिक उत्पादों और चुनिंदा कृषि वस्तुओं के क्षेत्र में द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं हैं. प्रधानमंत्री मोदी भारत की भूमिका और भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर काफी महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण रखते हैं.

प्रधानमंत्री मोदी G7 समिट के बाद 18 जून को पेरिस जाएंगे, जहां वह अतिरिक्त द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेने के साथ यूरोप के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप कार्यक्रम ‘VivaTech Summit’ में भी शामिल होंगे. इसके अलावा वह फ्रांस में भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे. दोनों नेताओं की मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब ईरान युद्ध और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर भारत पर भी पड़ रहा है. हाल के दिनों में ओमान तट के पास भारतीय नाविकों को ले जा रहे तेल टैंकरों पर अमेरिकी हमलों के कारण दोनों देशों के संबंधों में तनाव देखने को मिला है. 8 जून को पलाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर ‘मारिवेक्स’ पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद उसमें सवार 24 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया था. इसके दो दिन बाद ‘एमटी सेटेबेलो’ नामक एक अन्य टैंकर पर अमेरिकी हमले में 24 भारतीय नाविकों में से तीन की मौत हो गई थी. मृतकों में डेक कैडेट आदित्य शर्मा, इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया और चीफ इंजीनियर पतनाला सुरेश शामिल थे.

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इसके अलावा 11 जून को गिनी-बिसाऊ ध्वज वाले टैंकर ‘जलवीर’ पर भी हमला हुआ था, जिसमें 20 भारतीय नागरिक सवार थे. इन घटनाओं के बाद भारत ने वाशिंगटन के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया और दिल्ली में अमेरिका के प्रभारी राजदूत (Chargé d’Affaires) को तलब किया. विदेश मंत्रालय ने जहाजों पर घातक हथियारों के इस्तेमाल पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे हमले अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा और स्थिरता को प्रभावित करते हैं. भारत ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए संवाद और कूटनीति पर जोर दिया है. वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कथित तौर पर इन हमलों का बचाव किया. विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बातचीत में उन्होंने कहा कि अमेरिका होर्मुज में अपनी नौसैनिक नाकेबंदी के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं करेगा.

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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