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5 जुलाई से लोगों को नहीं मिलेगा राशन? छत्तीसगढ़ की 13 हजार राशन दुकानों पर लग सकता है ताला, 70 लाख से ज्यादा कार्डधारकों की बढ़ सकती है मुश्किलें

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के जरिए राशन लेने वाले करीब 70 लाख राशन कार्डधारकों के लिए बड़ी और चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। यदि राज्य सरकार और उचित मूल्य दुकान संचालकों के बीच जल्द सहमति नहीं बनती, तो 5 जुलाई 2026 से प्रदेश की लगभग 13 हजार राशन दुकानें अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकती हैं। ऐसी स्थिति में लाखों गरीब, जरूरतमंद और अंत्योदय परिवारों को समय पर राशन मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

पीडीएस संघ ने अपनी 9 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ का कहना है कि लंबे समय से विभिन्न मांगों को लेकर शासन-प्रशासन के समक्ष ज्ञापन और चर्चा की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसी वजह से मजबूर होकर 5 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लिया गया है।

5 जुलाई से ठप हो सकती है राशन वितरण व्यवस्था

यदि सरकार और पीडीएस संघ के बीच अंतिम समय तक कोई सहमति नहीं बनती, तो राज्यभर की करीब 13 हजार उचित मूल्य की राशन दुकानें बंद हो सकती हैं। इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली पूरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। हर महीने सरकारी राशन पर निर्भर लाखों परिवारों के सामने खाद्यान्न प्राप्त करने का संकट खड़ा हो सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हड़ताल लंबी चली तो इसका असर केवल हितग्राहियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संपूर्ण राशन वितरण व्यवस्था पर भी पड़ेगा।

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आखिर क्यों आंदोलन पर उतरे राशन दुकान संचालक?

पीडीएस संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश बाफना का आरोप है कि सरकार लगातार बढ़ती महंगाई के बावजूद राशन दुकान संचालकों के कमीशन में वर्षों से कोई बड़ा बदलाव नहीं कर रही है। उनका कहना है कि वर्तमान में मिलने वाला मार्जिन इतना कम है कि उससे दुकान का नियमित संचालन करना लगभग असंभव हो गया है।उन्होंने बताया कि दुकानों का किराया, कर्मचारियों का वेतन, बिजली बिल, इंटरनेट, परिवहन, स्टेशनरी, रखरखाव और अन्य प्रशासनिक खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन कमीशन पुरानी दरों पर ही दिया जा रहा है। ऐसे में अधिकांश संचालकों को आर्थिक नुकसान उठाकर दुकानें चलानी पड़ रही हैं।

मार्जिन राशि बढ़ाकर 150 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग

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पीडीएस संघ की प्रमुख मांगों में मार्जिन राशि को बढ़ाकर 150 रुपये प्रति क्विंटल करना शामिल है। संघ का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में यही राशि उचित है, जिससे राशन दुकानों का संचालन बिना आर्थिक नुकसान के किया जा सके।इसके अलावा संघ ने लंबित भुगतान, संचालन खर्च, नई वितरण व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक समस्याओं सहित कुल 9 मांगें सरकार के सामने रखी हैं।

नवंबर 2025 से नहीं मिला भुगतान, उधार लेकर चल रही दुकानें

संघ का आरोप है कि नवंबर 2025 से अब तक मार्जिन मनी का भुगतान नहीं किया गया है। इसके अलावा कई अन्य मदों की राशि भी महीनों से लंबित है। भुगतान समय पर नहीं मिलने के कारण अनेक राशन दुकान संचालकों को बैंक से कर्ज लेने या निजी उधारी के सहारे दुकानें संचालित करनी पड़ रही हैं।संचालकों का कहना है कि यदि जल्द भुगतान नहीं किया गया तो आर्थिक संकट और गहरा जाएगा तथा दुकानें चलाना संभव नहीं रह जाएगा।

नई राशन वितरण व्यवस्था पर भी जताई आपत्ति

पीडीएस संघ ने सरकार द्वारा लागू की जा रही नई राशन वितरण व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। संघ का कहना है कि नई प्रणाली में कई तकनीकी और व्यावहारिक समस्याएं हैं, जिनका समाधान किए बिना इसे लागू करना उचित नहीं होगा। उनका कहना है कि यदि इन समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया तो राशन वितरण व्यवस्था और अधिक प्रभावित हो सकती है।

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सरकार और संघ के बीच बातचीत पर टिकी उम्मीदें

फिलहाल सभी की नजर राज्य सरकार और पीडीएस संघ के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर है। उम्मीद की जा रही है कि 5 जुलाई से पहले दोनों पक्षों के बीच सहमति बन सकती है। हालांकि यदि बातचीत विफल रहती है, तो प्रदेशभर में राशन वितरण व्यवस्था बाधित हो सकती है और 70 लाख से अधिक राशन कार्डधारकों को समय पर खाद्यान्न नहीं मिल पाएगा।सरकार की ओर से फिलहाल इस हड़ताल को लेकर कोई अंतिम आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में अब यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में सरकार पीडीएस संघ की मांगों पर क्या निर्णय लेती है और हड़ताल को टालने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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