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छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पा

श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव में छठे दिन रुकमणी विवाह प्रसंग में आचार्य ने बताया कि भगवान को प्रेम करने के लिए उसे देखना जरूरी नहीं…

श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव में छठे दिन रुकमणी विवाह प्रसंग में आचार्य ने बताया कि भगवान को प्रेम करने के लिए उसे देखना जरूरी नहीं…
 
जांजगीर-चांपा। भागवत कथा में भगवान का मथुरा गमन कंस उद्धार गोपी उद्धव संवाद जरासंध के द्वारा आक्रमण एवं रुक्मणी विवाह की कथा प्रमुख रूप से निर्मित की गई। कथा का विस्ताररूप से वर्णन करते हुए ब्यास पीठ से पण्डित रमाकांत शर्मा ने कहा कि अपने मामा कंस के आमंत्रण पर भगवान मथुरा के लिए प्रस्थान किए मथुरा वासियों ने नयनाभिराम दर्शन प्राप्त करते हुए अभूतपूर्व स्वागत करते हुए कहा!    सजे हैं किशन कन्हैया आए हैं मथुरा की गलियां खुशियां मनाओ आज झुमके
कहते हुए उनका खूब स्वागत किया। दर्जी माली एवं कुब्जा के ऊपर कृपा करते हुए भगवान ने अपने मामा कंस का उद्धार किया।
  गोपी उद्धव संवाद मैं भगवान ने प्रमुख रूप से यह सिद्ध किया कि भक्ति के बिना ज्ञान अंधा है एवं ज्ञान के बिना भक्ति अधूरी है। परमात्मा को प्राप्त करने  लिए  सिर्फ ज्ञान  ही नहीं उसके लिए भक्ति भी आवश्यक है।
 भगवान और जरासंध के युद्ध से भी हमें बहुत बड़ी शिक्षा मिलती है जरा संघ एक बार आक्रमण करके हार गया परंतु वह मन से नहीं हारा।
 व्यक्ति को भी मन से नहीं हारना चाहिए एवं जीत के लिए सदैव प्रयासरत रहना चाहिए। जीवन में कभी हार को तो घबराइए नहीं प्रयत्न को बढ़ा दीजिए और प्रयत्न को बढ़ाएंगे एक न 1 दिन सफलता आपके कदम चूमेगी।
उम्र थका नहीं सकती ठोकरें गिरा नहीं सकती अगर जीतने की जिद हो परिस्थितियां हरा नहीं सकती
 जिंदगी की यही रीत है हार के बाद ही जीत है। जरासंध 17 बार परास्त होकर के 18 बार में विजय हासिल किया भगवान को भी मथुरा छोड़कर अपनी स्वयं की नगरी द्वारिका में जाकर के निवास करना पड़ा।
रुकमणी विवाह प्रसंग में आचार्य जी ने बताया कि भगवान को प्रेम करने के लिए उसे देखना आवश्यक नहीं रुकमणी भगवान को देखी नहीं है सिर्फ उनके गुणों को सुनकर ही उनकी और आकर्षित हुई है और उन्हें अपना पति बनाना चाहती है। रुक्मणी का भाई रूक्मी भगवान के विरोधियों के संग में रहते हुए कुसंग बस उन्होंने भी भगवान से बैर कर रखा है इसलिए कहा गया है दुः संगा सर्वथा त्याज्या कुसंग से व्यक्ति को हानि ही होती है। पानी की एक बूंद गर्म तवे पर पड़े तब वह मिट जाती है यही बूंद कमल के पत्ते पर पड़े तो चमकने लगती है और यही बूंद अगर सीप पर पड़ जाए तो खुद मोती बन जाती है पानी की बूंद वही है सिर्फ संगत का ही असर है। इसलिए सदैव हमें अपनी संगति का ध्यान रखना चाहिए हम किन लोगों के साथ कैसे व्यक्ति के साथ उठते बैठते हैं यह हमारे जीवन के ऊपर में बहुत ही प्रभाव डालता है। साथ ही साथ इसी कुसंग के कारण रूक्मी ने अपने पिता की आज्ञा की अवहेलना कर दिया व्यक्ति को चाहिए वह सदैव अपने माता पिता की आज्ञा का पालन करें अपने द्वारा कोई भी कार्य ऐसा ना होने दें जिससे माता-पिता को कष्ट हो यह ऐसे धन हैं जो हमें दुबारा नहीं मिल सकते। इसलिए सदा इनकी सेवा करते हुए हमें निरंतर इन्हें प्रसन्न रखना चाहिए। भगवान सदैव अपने भक्तों की प्रार्थना सुनते हैं रुकमणी की प्रार्थना पर उन्होंने सभी विरोधियों को परास्त कर रुकमणी का हरण कर द्वारका लाकर  अपने माता-पिता की आज्ञा अनुसार उनसे पानी ग्रहण किया। आज के बच्चे भी ध्यान दें विवाह वही करें जहां माता पिता की आज्ञा हो व्यक्ति को लव मैरिज लव जिहाद के चक्कर में पढ़ने से बचें एवं अपने कुल वंश की मर्यादा अपने मां-बाप की इज्ज़त सम्मान को ध्यान में रखते हुए कोई भी ऐसा कार्य न करें जिनसे पिताजी के मान सम्मान के ऊपर में कोई नहीं आंच आ सके। कथा में श्री चंद्र जी के विवाह की झांकी सभी को मंत्रमुग्ध करने वाली थी।

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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