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गांव में हत्या आम बात थी, बेटियां पढ़ नही पाती थी! राघवेन्द्र पाण्डेय की ईच्छाशक्ति से कुटरा में शिक्षा सुविधाओं का विस्तार,तथा मेडिकल काॅलेज की स्थापना, पढ़े समाज को प्रेरित करने वाली ईन साईड स्टोरी…

जांजगीर-चांपा। जिला मुख्यालय जांजगीर से महज 10 किमी. दुर स्थित ग्राम कुटरा में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधा नही होने से अशिक्षित युवा नशा और हिंसा के रास्ते पर चल रहे थे। आपसी विवाद में आये दिन यहां किसी न किसी की हत्या होना आम बात थी। गांव में आठवीं तक ही स्कुल होने के कारण बेटीयां भी आगे की पढ़ाई नही कर पाती थी, चुल्हा-चौका को ही अपनी किस्मत मानती थी। गांव की बिगड़ती हालत से चिंतित कुटरा के बुजुर्गों ने अपने मालगुजार स्व.रामसरकार पाण्डेय के बेटे जांजगीर निवासी राघवेन्द्र पाण्डेय से संपर्क किया था, तथा उन्हें अपनी पीड़ा और व्यथा सुनाई थी,और बताया कि स्व.रामसरकार पाण्डेय की ईच्छा थी गांव में अस्पताल और हायर सेकेंड्री स्कूल बनवाने की, लेकिन उनके असामयिक देहांत से सब कुछ बिखर गया है।

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पिता का सपना बेटे ने किया साकार

वर्ष 2007 में गांव की हालात से राघवेन्द्र पाण्डेय ने शासन-प्रशासन को अवगत कराया तथा रामसरकार पाण्डेय शास पुर्व माध्य.शाला का हाईस्कूल में उन्नयन की कार्यवाही हेतु अनुरोध किया था। वर्तमान में स्कुल का हायर सेकेंड्री तक उन्नयन हो गया है। राघवेन्द्र के सतत् प्रयास से हायर सेकेंड्री स्कुल के अतिरिक्त कक्ष,मिडिल और प्राथमिक शाला के अतिरिक्त कक्ष,तथा उपस्वास्थ्य केन्द्र भवन निर्माण के लिए खनिज मद से राशि स्वीकृत किया था। स्कुल खुलने से बच्चों सहीत पालकों ने भी शिक्षा के महत्व को समझा है। गांव के बच्चे डाॅक्टर ईजिनियर की पढ़ाई कर रहे है, बेटियां भी अब विदेश में मेडिकल की शिक्षा प्राप्त कर रही है।

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जीवनदायिनी है, पाण्डेय परिवार की निजी तालाब

निस्तारणीकरण के लिए वैसे तो कुटरा में कई तालाब है। लेकिन गांव की आधी से अधिक करीब 25एकड़ में फैले पाण्डेय परिवार के निजी तालाब का उपयोग करते है। तालाब के पार में ही रामसरकार स्कुल का निर्माण किया गया है। पास के ग्राम कुथुर में भी पाण्डेय परिवार की निजी भुमि में आंगनबाड़ी केंद्र तथा सामुदायिक भवन का निर्माण किया गया है।

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जनसरोकार से जुड़े प्रभावी चेहरा कृषिरत्न रामसरकार

70के दशक में स्व.रामसरकार पाण्डेय जनसरोकार से जुड़े प्रभावशाली चेहरा थे। गरीब, मजदुर, किसान और कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें मप्र.शासन ने कृषि रत्न की उपाधि से सम्मानित किया था।राज्य गठन के बाद छग. सरकार ने स्व.रामसरकार पाण्डेय की स्मृति में कुटरा के स्कुल का नामकरण किया है।

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कुटरा को मिली आदर्श ग्राम की पहचान

दो दशक के लम्बे संघर्ष के बाद शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कुटरा ने मांडल ग्राम के रूप में अपनी पहचान बनाई है।
राघवेन्द्र पाण्डेय सहीत गांव के राजू कश्यप, रामकुमार खरे, रामधन कश्यप, रामेश्वर कश्यप,छतराम कश्यप, पवन दिनकर, कुमार बंधु लाठिया, देवी निर्मलकर विद्यालय के शिक्षक अनुराग तिवारी, देवेन्द्र साहु, सहीत विद्यालय परिवार और गांव वालों की सामुहिक प्रयास ने शासन-प्रशासन सहीत प्रदेश भर के लोगों का ध्यान कुटरा गांव की ओर आकर्षित किया है। राजनितिक उठा-पटक के बीच मेडिकल काॅलेज की स्थापना के लिए जिला प्रशासन ने ग्राम कुटरा का चयन किया है,भवन निर्माण के लिए हाल ही में राघवेन्द्र पाण्डेय ने विधिवत भुमिपुजन किया है।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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