सोशल मीडिया का सहारा लेकर अपने आप को पत्रकार बता रहे सूदखोर, अपराधी, कबाड़ी, रेत माफिया, भू-माफिया और खनन माफिया, जांजगीर-चांपा जिले में बेधड़क काम कर रहा फर्जी और वसूलीबाज पत्रकारों का एक संगठित गिरोह…

जांजगीर-चांपा। जिले में इन दिनों पत्रकारों की बाढ़ आ गई है। सूदखोर, अपराधी, कबाडी, रेत माफिया, भू-माफिया, कोल माफिया आदि सोशल मीडिया का सहारा लेकर अपने आप को पत्रकार बता रहे हैं। सोशल मीडिया से डिजिटल इंडिया को बढ़ावा तो मिला है लेकिन, इन फर्जी पत्रकारों के लिए यह किसी वरदान से काम नहीं है। इनका एक संगठित गिरोह जिले भर में काम कर रहा है।
यह पहले व्हाट्सएप पर ग्रुप बनाते हैं, उसमें सभी अधिकारी व कर्मचारियों एवं अन्य लोगों का नंबर जोड़ते हैं और कॉपी न्यूज़ या दूसरों से खबर लिखवा कर ग्रूप में डाल देते हैं और फिर पत्रकारिता की धाक बताते हैं। इन्हें लगता है कि पत्रकारिता का सहारा लेकर अपने गैरकानूनी कामों को यह अंजाम दे पाएंगे, पर इन्हें नहीं पता कि पुलिस के चाबुक से कोई नहीं बच पाया है।इनकी वजह से जिले भर के वास्तविक पत्रकारों की छवि में आंच रही है। आलम यह है कि स्वार्थवास कुछ मीडिया संस्थान और पोर्टल वालों के द्वारा प्रेस कार्ड का गोरखधंधा किया जा रहा है। संबंधित मीडिया संस्थानों द्वारा चंद रूपए लेकर अनाप-शनाप तरीके से अपात्र लोगों को प्रेस कार्ड बांटा जा रहा है। वहीं प्रेस कार्ड रखने वाले अपात्र लोग पत्रकारिता की आड़ में तमाम् तरह के अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। ऐसा नहीं है कि ऐसे लोगों के खिलाफ शासन-प्रशासन तक शिकायत नहीं पहुंच रही है। समय-समय पर इनके खिलाफ शिकायत भी पहुंच रही है, लेकिन पुलिस और प्रशासन के अधिकारी ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
डरा-धमकाकर लोगों से करते हैं अवैध वसूली
फर्जी पत्रकार जिले भर में घूम-घूमकर अवैध कृत्यों को अंजाम देने के साथ ही डरा-धमकाकर लोगों से अवैध वसूली करने से गुरेज नहीं कर रहे हैं। इसी वजह से जिले समेत पूरे प्रदेश में इन दिनों फर्जी पत्रकार बनने और बनाने का गोरखधंधा तेजी से बढ़ता जा रहा है। सड़कों पर दिखने वाली हर चौथी गाड़ी में से एक गाड़ी में जरूर प्रेस लोगो दिखता नजर आ जाएगा।
आईडी कार्ड बनवा कर दिखाते है रौब
ये फर्जी पत्रकार अपनी गाड़ियों में बड़ा-बड़ा प्रेस का मोनोग्राम तो लगाते ही हैं। साथ ही फर्जी आईडी कार्ड भी बनवाकर अधिकारियों-कर्मचारियों व लोगों को रौब में लेने का प्रयास भी करते हैं। कुछ संस्थाएं तो ऐसी हैं, जो एक हजार रूपए से लेकर पांच हजार रूपए जमा करवाकर अपने संस्थान का कार्ड भी बना देती है और बेरोजगार युवकों को गुमराह कर उनसे धन उगाही करवाती है, लेकिन पकड़े जाने पर वो संस्थाएं भी भाग खड़ी होती हैं।
सम्मानित पत्रकार महसूस कर रहे अपमानित
जिले में फर्जी पत्रकारों की लगातार बढ़ती संख्या से न सिर्फ छोटे कर्मचारी से लेकर अधिकारी परेशान हैं, बल्कि खुद समाज में सम्मानित पत्रकार भी अब अपमानित महसूस करते नजर आते हैं। कुछ फर्जी पत्रकार तो अपनी गाड़ियों के आगे-पीछे से लेकर वीआईपी विस्टिंग कार्ड भी छपवा रखे है, जो लोग पुलिस की चेकिंग के दौरान उनको प्रेस (मीडिया) का धौंस भी दिखाते हैं। गाड़ी रोकने पर पुलिसकर्मी से बद्तमीजी पर भी उतारू हो जाते हैं। इनमें से तो बहुत से ऐसे लोग हैं, जो पेशे से सूदखोर, भू-माफिया और अपराधी हैं, वे पत्रकारिता की आड़ में तमाम अवैध कृत्यों को अंजाम दे रहे हैं।



