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सेवा सहकारी समितियों में प्रभारी बनाने के एवज में की जा रही लाखों की वसूली, दो से ढाई लाख रुपए लेकर कंप्यूटर ऑपरेटरो को बनाया गया है खरीदी केंद्र का प्रभारी…

जांजगीर-चांपा। सेवा सहकारी समितियों में प्रभारी की नियुक्ति को लेकर अधिकारियों द्वारा लाखों रुपए की वसूली की जा रही है जहां जिला विपणन अधिकारी एवं जिला खाद्य अधिकारी तथा पंजीयक द्वारा सिंडिकेट बनाकर नए पदस्थ नोडल अधिकारी को उक्त आदेश पर हस्ताक्षर के लिए बाध्य किए जाने का मामला सामने आया है। सेवा सहकारी समितियों का प्रभारी बनाने के लिए जहां प्रत्येक व्यक्ति से दो से ढाई लाख रुपए लिया गया है वहीं ऑपरेटर को प्रभारी बनाने के बदले मोटी रकम की उगाही की जा रही है। जिसको लेकर जिले में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही है। इस मामले का निष्पक्ष जांच किया जाना चाहिए ताकि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई हो सके।

ज्ञात हो कि सेवा सहकारी समिति के अधिकारी नहीं होने के बाद भी जिला विपणन अधिकारी द्वारा सहकारिता विभाग में खुलेआम दबाव बनाया जा रहा है जो प्रत्येक कार्यों में दखल अंदाजी करते रहते हैं। अपने विभाग में भ्रष्टाचार को अंजाम देने के साथ-साथ अब नए पदस्थ हुए नोडल अधिकारी के कंधे पर एक तरह से बंदूक चलाने का काम करने लगे हैं जो अपनी मनमर्जी से सेवा सहकारी समितियों में प्रभारी अधिकारी की नियुक्ति कर रहे हैं जिसके लिए जिला नोडल अधिकारी के ऊपर हस्ताक्षर के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इस कार्य में जिला खाद्य अधिकारी एवं सहकारिता पंजीयन को साथ लेकर नए प्रभारियों से लाखों रुपए की वसूली धान खरीदी प्रभारी बनाने के लिए लिया जा रहा है। इतने बड़े खेल होने के बाद भी जिला प्रशासन के अधिकारी मौन बने हुए हैं। यहां यह बताना आवश्यक है कि एक माह पहले ही कोऑपरेटिव सेक्टर में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरो द्वारा अपने विभिन्न मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया गया था उस दौरान ना तो कोऑपरेटिव विभाग के लोग इन्हें अपना कर्मचारी मानने को तैयार थे और ना ही विपणन विभाग के लोग इसे अपने विभाग का हिस्सा मान रहे थे। जबकि मूलतः उक्त कंप्यूटर ऑपरेटर सहकारिता विभाग के ही कर्मचारियों में शामिल माने जाते हैं। किंतु जब बात फायदे की आई तो जिला विपणन अधिकारी द्वारा उक्त कंप्यूटर ऑपरेटरो को सहकारिता विभाग का कर्मचारी मानते हुए उन्हें सेवा सहकारी समितियों का प्रभारी तक बना दिया गया है यह कार्य कोई मुफ्त में नहीं किया गया है बल्कि इसके आवाज में जिला विपणन अधिकारी द्वारा दो से ढाई लाख रुपए प्रत्येक कंप्यूटर ऑपरेटर से धान खरीदी केंद्र का प्रभारी बनाए जाने का कीमत लिया गया है । इस कार्य में जिला विपणन अधिकारी ने अपने विभाग के अलावा जिला खाद्य अधिकारी एवं सहकारिता के पंजीयन को भी शामिल किया है। जिनके द्वारा संयुक्त रूप से दबाव बनाकर नोडल अधिकारी को उक्त आदेश पर हस्ताक्षर के लिए बाध्य किया गया है । जबकि जिला नोडल अधिकारी को यह नहीं मालूम की कौन अधिकारी कहां पदस्थ हैं और कौन व्यक्ति किसका प्रभारी है क्योंकि वह महज एक सप्ताह पहले ही जिले में पद पदस्थ हुए हैं जिसके सहस्त्र सरलता एव नए पदस्थ होने का खुलेआम फायदा जिला विपणन अधिकारी द्वारा उठाया जा रहा है । जो धान खरीदी के इस महत्वपूर्ण अवसर को जिला अधिकारी अपने सहयोगी अन्य अधिकारी के साथ कमाई का प्रमुख जरिया बना लिए हैं। सच कहा जाए तो यह अधिकारी हमेशा से सुर्खियों में रहा है जिनके द्वारा कस्टम मिलिंग के नाम से राशि वसूलने का आरोप पिछले समय भी लगते रहा है जिन्होंने कस्टम मीनिंग में वसूली कर अपने उच्च अधिकारियों एवं राजनेताओं को भेजते रहे हैं। कांग्रेस शासन में सुर्खियों में रहे उक्त अधिकारी के कारनामा कम होने का नाम नहीं ले रहा है जिनके विभागीय कार्यों की जांच होनी चाहिए। वही आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने वाले उक्त अधिकारी के ऊपर के यहां लोकायुक्त का छापा भी पढ़ना चाहिए ताकि लगातार हो रहे भ्रष्टाचार पर से पर्दा हट सके। बताया जाता है कि उक्त अधिकारियों को जो सिंडिकेट बनाये है उसे जिला प्रशासन के एक राजस्व अधिकारी का विशेष संरक्षण प्राप्त है जो राज्य शासन के धान खरीदी के इस महत्वपूर्ण योजना में अवैध उगाही करने वाले अधिकारियों को संरक्षण प्रदान करने का काम कर रहे हैं। इस कार्य से प्रदेश सरकार की जहां किरकिरी होने लगी है वहीं जिला प्रशासन का संरक्षण होने का आरोप लगने लगा है।

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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