मनरेगा के विकास कार्यों की स्वीकृति में जांजगीर जिला पंचायत के कर्मचारी अमित सोनी कर रहा कमीशन का खेल, गांव-गांव में सरपंचो तथा जनप्रतिनिधियों को करा रहे झगड़ा, नवीन जिला सक्ती के परियोजना निदेशक का रिमोट कंट्रोल मनरेगा शाखा के बाबू अमित सोनी…

सक्ती। जिला पंचायत से होने वाले विकास कार्यों में जनपद से लेकर जिला पंचायत तक मोटे कमीशन का खेल चल रहा है। नए जिला घोषित होने से क्षेत्र की जनता विकास होने की उम्मीद लगा बैठा थे लेकिन उन्हें क्या पता था कि लेनदेन में मंझा हुआ खिलाड़ी अपना मूल कार्य छोड़कर इस नए जिले के विकास कार्यो में अपनी नजर लगा देगा सरकार तथा सत्ता बदलने के बाद खुद सत्ताधारी पार्टी में खेमेबाजी तथा गुटबाज़ी बढ़ गयी है। मस्तूरी बलौदा था अन्य कई स्थानों पर अपने कारनामो के लिए चर्चित परियोजना निदेशक के खेल का पर्दा यहां भी उठ रहा है। मनरेगा कार्यो की स्वीकृति के एवज में कमीशन लेने का खेल चल रहा है लोगो ने बताया कि जिला पंचायत जांजगीर में बैठे कर्मचारी अमित सोनी जो आज की स्थिति में जिला परियोजना अधिकारी सक्ती के और बड़े अधिकारी बन कर बैठे हुए है और सक्ती जिले का खेल जांजगीर चाम्पा जिला पंचायत के कर्मचारी चला रहे है,नवीन जिला सक्ती के परियोजना निदेशक का पूरा कंट्रोल जिला पंचायत जांजगीर के संविदा कर्मचारी अमित सोनी के पास है जैसे रिमोट कंट्रोल दबाते है वैसे ही परियोजना निदेशक की चाल चलती है,अत्यंत आश्चर्य जनक है कि एक बाबू के द्वारा इतने बड़े अधिकारी को कठपुतली बनाकर नचाया जा रहा है,पूरे जिले में काम के बदले कमीशन की प्रतिशत बढ़ाने घटाने को लेकर आगे और रार बढ़ने की आशंका है। फिलहाल काम हथियाने और चहेते दलालो को ही काम देने पर विशेष जोर रहता है। जो समझ से परे हुए है।
अपने काले कारनामों से एक बर्खास्त भी हो चुका है यह संविदा कर्मचारी
ज्ञात हो कि अमित सोनी को उसके लगातार अनियमितता तथा राशि के हेरफेर के कारण बर्खास्त कर दिया गया था लेकिन चालबाजी में माहिर कर्मचारी पिछले दरवाजे से कैसे पुनः कार्यालय में प्रवेश पा लिया यह आज भी सवालो के घेरे में है डंके के चोट पर बाबू अमित सोनी कहता है कि इस बार की मनरेगा का पूरा काम उसका है किसको काम देना है,किसको नही देना वही निर्णय लेगा अमित सोनी का दावा है कि वह जिसको भी इशारा कर दे वह व्यक्ति स्टीमेट बनवा सकता है काम होने की पूरी गारंटी है अधिकारी उसके जेब मे ही पकड़कर कभी भी उससे हस्ताक्षर करवा सकता है।
एक छोटे से बाबू के इस प्रकार हिम्मत बढ़ जाने से नई सरकार आने से जो राहत महसूस हो रही थी अब धूमिल होता जा रहा है यह बहुत ही सोचनीय मामला है कि एक छोटा सा बाबू चाहे सरकार किसी की भी रहे उसका मायाजाल सब पर कैसे चल जाता है हालांकि उसका मार्गदर्शक जिले में बैठा परियोजना निदेशक ही है।
वर्जन
नाम नही छापने के सर्त पर सरपंच ने बताया है कि उसके गांव के कोई भी मनरेगा का काम बिना कमीशन के सोनी आगे बढ़ने ही नही दे रहा है।



