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क्या डाइट से हीमोग्लोबिन बढ़ाना हमेशा संभव है, कब जरूरी है इंजेक्शन?

हीमोग्लोबिन हमारे खून में पाया जाने वाला एक प्रोटीन है जो रेड ब्लड सेल्स (RBCs) में मौजूद होता है. इसका मुख्य काम शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन पहुंचाना और कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालना है. हीमोग्लोबिन की पर्याप्त मात्रा होने से शरीर को एनर्जी मिलती है, दिमाग और मांसपेशियां सही तरह से काम करती हैं और इम्यून सिस्टम मजबूत रहता है. स्वस्थ एडल्ट पुरुषों में हीमोग्लोबिन का स्तर 13-17 g/dL और महिलाओं में 12-15 g/dL सामान्य माना जाता है. बच्चों और प्रेग्नेंट महिलाओं में इसकी अलग-अलग जरूरत होती है. इसीलिए डॉक्टर समय-समय पर ब्लड टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं ताकि कमी को शुरुआती स्तर पर ही पहचाना और ठीक किया जा सके.

दिल्ली एमसीडी में डॉ. अजय कुमार बताते हैं कि हीमोग्लोबिन की कमी को एनीमिया कहा जाता है और यह शरीर पर कई तरह से असर डालती है. सबसे पहले थकान और कमजोरी महसूस होती है क्योंकि ऑक्सीजन की सप्लाई कम हो जाती है. दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन न पहुंचने से चक्कर, सिरदर्द और फोकस करने में दिक्कत होती है. गंभीर स्थिति में सांस लेने में तकलीफ, हार्ट की धड़कन तेज होना और चेस्ट पेन जैसी समस्या भी हो सकती है. लंबे समय तक कमी बनी रहे तो हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है.

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डॉ अजय बताते हैं कि महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है क्योंकि पीरियड्स और प्रेग्नेंसी के दौरान खून की कमी होना आम है. बच्चों में हीमोग्लोबिन कम होने से उनकी ग्रोथ और सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. बुज़ुर्गों में यह कमजोरी और लो इम्यूनिटी पॉवर का कारण बन सकती है. इसलिए यह सिर्फ सामान्य थकान नहीं बल्कि गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जिस पर समय रहते ध्यान देना बेहद जरूरी है.

हीमोग्लोबिन बढ़ाने का सही तरीका क्या है?
आरएमएल हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग में यूनिट हेड डॉ. सुभाष गिरि बताते हैं कि हीमोग्लोबिन की मात्रा पुरुषों के लिए 14 से 17 ग्राम प्रति डेसीलिटर (g/dL) और महिलाओं के लिए 12 से 15 ग्राम प्रति डेसीलिटर (g/dL) के बीच होनी चाहिए. ये नॉर्मल रेंज है. लेकिन अगर इसका लेवल 13 से 10 के बीच है तो इसे डाइट और सप्लीमेंट्स की मदद से बढ़ाया जा सकता है. आयरन से भरपूर डाइट जैसे हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, अनार, खजूर, गुड़, बीन्स, दालें, मछली और मीट इसमें मददगार साबित होते हैं. साथ ही, विटामिन सी युक्त फल जैसे संतरा, आंवला और नींबू आयरन के एब्जॉर्प्शन को आसान बनाते हैं.

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हल्की कमी में सिर्फ डाइट और ओरल सप्लीमेंट्स से फायदा मिल जाता है, लेकिन जिन लोगों में हीमोग्लोबिन बहुत ज्यादा कम है यानी, 9 ग्राम प्रति डेसीलिटर से कम है या प्रेग्नेंट महिलाओं में गंभीर एनीमिया है या जिनकी आंत पोषक तत्वों को ठीक से एब्जॉर्ब नहीं कर पाती, उनके लिए सिर्फ डाइट काफी नहीं होती है. ऐसे मामलों में डॉक्टर आयरन इंजेक्शन, IV आयरन थेरेपी या कभी-कभी ब्लड ट्रांसफ्यूजन तक की सलाह देते हैं.

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मतलब यह है कि हर व्यक्ति की स्थिति अलग होती है. हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए केवल डाइट काफी है या इंजेक्शन की ज़रूरत पड़ेगी, यह डॉक्टर की जांच और ब्लड टेस्ट रिपोर्ट देखकर ही तय किया जा सकता है.

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इन चीजों का भी रखें ध्यान
पालक, मेथी, चुकंदर, अनार, सेब, खजूर, गुड़, राजमा, मसूर दाल, अंडा, मांस और मछली डाइट में शामिल करें.

संतरा, आंवला और नींबू जैसे विटामिन C युक्त फल आयरन के एब्जॉर्प्शन में मदद करते हैं.

खाने के तुरंत बाद चाय या कॉफी पीने से बचें.

समय-समय पर Complete Blood Count (CBC) और Serum Ferritin Test करवाएं.

प्रेग्नेंट महिलाएं और बच्चे डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स लें.

पर्याप्त नींद लें और तनाव को दूर करें.

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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