Reg No. CG-06-0026209
IMG-20250604-WA0015-1
IMG-20250604-WA0014-1
WhatsApp Image 2026-06-25 at 17.56.31 (1)
WhatsApp Image 2026-06-25 at 17.55.51 (1)
b5ce874a-8a3f-482a-9d4a-eaf6ab18dc7e
छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पादेश- विदेशराज्य एवं शहररायपुर

कलाई पर बंधी स्मार्टवॉच दिल की धड़कन का पता कैसे लगा लेती है? ऐसे काम करती है टेक्नोलॉजी, जानें पूरा तरीका

Heart rate tracking in smartwatches: आजकल स्मार्टवॉच में हार्ट रेट ट्रैकिंग फीचर मिलना आम बात हो गई है. स्मार्टवॉच के साथ-साथ स्मार्ट रिंग और अब तो एयरपॉड्स में भी यह फीचर आने लगा है. ऐसा माना जाता है कि हार्ट रेट से दिल के स्वास्थ्य का पता आसानी से लगाया जा सकता है. हार्ट रेट सामान्य होने का मतलब है कि आपका दिल ठीक तरीके से ब्लड को पंप कर रहा है और सभी अंगों तक ऑक्सीजन पहुंच रही है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये डिवाइस हार्ट रेट का पता कैसे लगाते हैं? अगर नहीं तो चलिए आज इस सवाल का जवाब जानते हैं.

See also  CG BREAKING एक निजी फैक्ट्री में बड़ा हादसा, हादसे में 6 कर्मचारियों की मौत, वहीं 6 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 2 हालत गंभीर

कैसे काम करती है यह टेक्नोलॉजी?

आपने गौर किया होगा कि स्मार्टवॉच के पीछे लगातार ग्रीन लाइट फ्लैश होती रहती है. लाइट के साथ ही एक ऑप्टिकल सेंसर लगा होता है. ग्रीन लाइट ही कलाई से आपकी हार्ट रेट का पता लगाती है. दरअसल, कलर व्हील पर लाल और हरा एक-दूसरे के बिल्कुल अपॉजिट होते हैं. इसलिए ब्लड ग्रीन लाइट को जल्दी अब्जॉर्ब कर लेता है. ब्लड से रिफ्लेक्ट होकर आने वाली लाइट को डिटेक्ट करने का काम ऑप्टिकल सेंसर का होता है.

ऐसे लगता है हार्ट रेट का पता

लाइट के जरिए हार्ट रेट को मापने को कहा फोटोप्लेथिस्मोग्राफी (PSP) कहा जाता है. हर धड़कन के बाद हार्ट की मसल सिकुड़ जाती है. इससे नसों में दौड़ रहे खून की मात्रा बढ़ जाती है. जब मसल रिलैक्स होती है तो खून की मात्रा कम हो जाती है. खून की मात्रा बढने से जब नसें फूलती हैं तो ये ज्यादा ग्रीन लाइट अब्जॉर्ब करती हैं और जब ये रिलैक्स होती हैं तो अब्जॉर्ब होने वाली लाइट की मात्रा कम रह जाती है. नसों द्वारा लाइट अब्जॉर्ब करने के आधार पर सॉफ्टवेयर प्लस रेट का पता लगाता है और आपको स्मार्टवॉच पर हार्ट रेट मेजरमेंट दिखता है.

Advertisment

संभावित बीमारी का भी चल जाता है पता

See also  CM नीतीश ने दिल्ली में जीत पर BJP को दी बधाई...

आजकल कई कंपनियां नए डिवाइस और सॉफ्टवेयर में एडवांस एल्गोरिद्म का यूज कर रही हैं, जो पल्स रेट के आधार पर संभावित बीमारी का अंदाजा लगा सकती है. हालांकि, इनकी सटीकता अब भी परफेक्शन के लेवल पर नहीं पहुंची है और लोगों को नियमित तौर पर हेल्थ चेकअप कराने की सलाह दी जाती है.

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!