Ganesh Chaturthi 2026: आज घर-घर गूंजेगा गणपति बप्पा मोरया, लेकिन स्थापना से पहले जरूर जान लें ये शुभ मुहूर्त

Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी के पावन पर्व को लेकर घरों और गणेश पंडालों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार गणेश चतुर्थी का पर्व विशेष संयोग लेकर आया है। करीब 25 साल बाद हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी का पर्व एक ही दिन पड़ने का शुभ संयोग बना है। तीज का व्रत शुरू होने के साथ ही घरों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।
मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के दिन विधि-विधान और शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश की स्थापना करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं। यदि आप भी इस वर्ष घर में गणपति बप्पा को विराजमान करने जा रहे हैं तो स्थापना के शुभ समय का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।
दोपहर में गणपति स्थापना को माना जाता है शुभ
ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की स्थापना के लिए दोपहर का समय विशेष शुभ माना जाता है। भगवान गणेश को ‘दोपहरिया गणेश’ भी कहा जाता है, इसलिए गणपति स्थापना के लिए दोपहर का मुहूर्त विशेष महत्व रखता है।
ऐसे में जो श्रद्धालु घर पर गणेश प्रतिमा स्थापित कर रहे हैं, वे शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश को विधि-विधान के साथ विराजमान कर सकते हैं। स्थापना से पहले घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई कर गणपति की पूजा की तैयारी पूरी कर लेना चाहिए।
दोपहर में स्थापना नहीं कर पाए तो शाम को क्या करें?
कई श्रद्धालुओं के लिए दोपहर के समय गणपति स्थापना करना संभव नहीं हो पाता। ऐसे लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार दोपहर में स्थापना नहीं कर पाने वाले श्रद्धालु शाम के शुभ समय में भी भगवान गणेश को घर में विराजमान कर सकते हैं।
हालांकि गणपति स्थापना के लिए स्थानीय पंचांग में बताए गए शुभ समय को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होने के कारण मुहूर्त में कुछ बदलाव भी हो सकता है।
इस बार तीज और गणेश चतुर्थी का खास संयोग
इस वर्ष हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी का एक ही दिन पड़ना धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। लंबे अंतराल के बाद बने इस संयोग को लेकर श्रद्धालुओं में भी खास उत्साह दिखाई दे रहा है।
हरितालिका तीज पर महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं, जबकि गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की आराधना की जाती है। ऐसे में एक ही दिन दोनों पर्व आने से धार्मिक आयोजनों और पूजा-पाठ का महत्व और बढ़ गया है।
गणपति स्थापना से पहले इन बातों का रखें ध्यान
गणेश प्रतिमा स्थापित करने से पहले पूजा स्थल को साफ करके वहां चौकी या पाट पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएं। इसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमा को स्थापित करें। पूजा में दूर्वा, मोदक, फल, फूल और सिंदूर आदि अर्पित करने की परंपरा है।
भगवान गणेश को दूर्वा विशेष प्रिय मानी जाती है। पूजा के दौरान गणपति मंत्रों का जाप करते हुए विधि-विधान से आरती करें। श्रद्धालु अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा की विधि अपना सकते हैं।गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा की स्थापना के बाद श्रद्धालु कई दिनों तक उनकी पूजा-अर्चना करते हैं और इसके बाद विधि-विधान से विसर्जन किया जाता है। इसलिए स्थापना के समय शुभ मुहूर्त के साथ पूजा की पूरी तैयारी करना भी महत्वपूर्ण है।नोट: गणेश स्थापना के सटीक मुहूर्त में शहर और पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है। इसलिए अपने स्थानीय पंचांग या ज्योतिषाचार्य से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।



