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छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पा

शक्ति आराधना के महापर्व में लीन भक्त, विभिन्न धार्मिक कार्यकमों का हो रहा आयोजन, सुबह शाम के आरती में सैकड़ों की संख्या में उमड़ रहे श्रद्धालू…

शक्ति आराधना के महापर्व में लीन भक्त

विभिन्न धार्मिक कार्यकमों का हो रहा आयोजन

सुबह शाम के आरती में सैकड़ों की संख्या में उमड़ रहे श्रद्धालू

सकर्रा-मालखरौदा। स्कूल चौंक सकर्रा में आदिशक्ति मां जगदम्बा की आराधना में भक्त डूबे हुए हैं। सुबह शाम मां जगत जननी दुर्गा भवानी की जय-जयकार हो रही है। शक्ति अराधना का महापर्व बीच बस्ती में धूम धाम से मनाया जा रहा है। समिति द्वारा पंडालों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। झिलमिल सितारों की रोशनी से जगमगा रहा है। विद्युत से साज-सज्जा बेहद मनमोहक ढंग से की गई है। रात्रि में देखने लायक दृश्य में दिखाई दे रहे हैं। लोग भारी संख्या में मां जगत जननी के दर्शन के लिए खासकर रात्रि में उमड़ रहे हैं। वही जस गायन कार्यक्रम संपन्न हो रहे हैं। जिसमें देवी मां का रूप धारण कर लोगों को दर्शन दे रही हैं। पंडालों में रात में होने वाली माँ दुर्गा की महाआरती में सैकड़ों की संख्या में उमड़ता भक्तों का सैलाब नवरात्रि की भव्यता को चरितार्थ कर रहा है। यहां रोज़ाना भजन गायकों द्वारा गायी जा रही माता की तीन अलग-अलग आरतियों पर भक्त भाव बिभोर हो रहे है।

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आज होगी सातवीं शक्ति कालरात्रि की पूजा

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समिति के समारू चंद्रा ने माँ जगदंबा के आराधना के नवरात्री के सातवे दिन को लेकर बताया की नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा की सातवीं शक्ति मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। माता कालरात्रि को ही महायोगीश्वरी, महायोगिनी और शुभंकरी कहा गया है। मां कालरात्रि की विधिवत पूजा अर्चना करने से माता अपने भक्तों को काल से बचाती हैं अर्थात माता के भक्त को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। माता कालरात्रि से ही सभी सिद्धियां प्राप्त होती हैं इसलिए तंत्र मंत्र के साधक मां कालरात्रि के विशेष रूप से पूजा अर्चना करते हैं। नवरात्रि की सप्तमी तिथि की पूजा सुबह में अन्य दिनों की तरह की होती है लेकिन रात्रि में माता की विशेष पूजा भी की जाती है। आइए जानते हैं मां कालरात्रि का स्वरूप, भोग, आरती और मंत्र…माता का वर्ण अंधकार की भांति एकदाम काला है इसलिए मां दुर्गा की इस शक्ति को कालरात्रि कहा जाता है। मां कालरात्रि की विधिवत पूजा अर्चना करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है और भूत प्रेत समेत सभी तरह की नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। मां कालरात्रि अपने भक्तों को आशीष प्रदान करती हैं और शत्रुओं व दुष्टों का संहार कर सभी दुख दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति का वास होता है। माता की पूजा रात्रि के समय भी होती है और ‘ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम:।’ मंत्र का जप किया जाता है। यह माता का सिद्ध मंत्र है। आज रात सवा लाख बार इस मंत्र का जप करने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है। माना जाता है कि माता की पूजा करने से साधक का मन सहस्त्रार चक्र में स्थित होता है।

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संध्या आरती में खिचड़ी सहित अन्य प्रसाद का वितरण

स्कूल चौंक सकर्रा मे संध्या आरती के बाद समितियों व् श्रद्धालुओं द्वारा खिचड़ी सहित अन्य प्रसादों का वितरण किया किया जा रहा है।श्रद्धालु प्रसाद भक्तों के प्रसाद वितरण के लिए सामने आ रहें है।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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