CG News: बारिश में डूबा जैजैपुर अस्पताल, डिलीवरी रूम तक पहुंचा गंदा पानी, मरीजों में मची अफरा-तफरी

Jaijaipur Community Health Centre Waterlogging की घटना ने सक्ती जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देर रात हुई मूसलाधार बारिश के बाद जैजैपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नाली का गंदा पानी घुस गया। देखते ही देखते अस्पताल के कई हिस्सों में घुटनों तक पानी भर गया, जिससे मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल स्टाफ को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
Jaijaipur Community Health Centre Waterlogging के कारण अस्पताल का डिलीवरी रूम, जनरल वार्ड, इंजेक्शन कक्ष, ड्रेसिंग रूम और स्टोर सहित कई महत्वपूर्ण हिस्से जलमग्न हो गए। सबसे अधिक चिंता की बात यह रही कि जहां नवजात शिशुओं और प्रसूताओं का इलाज चल रहा था, वहां भी गंदा पानी पहुंच गया। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया और मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे।
रातभर अफरा-तफरी, परिजनों ने संभाली जिम्मेदारी
Jaijaipur Community Health Centre Waterlogging के दौरान अस्पताल में पूरी रात अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। मरीजों के परिजन अपने स्तर पर बेड, दवाइयों और नवजात शिशुओं को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश करते रहे। कई लोगों ने पानी के बीच ही बच्चों और प्रसूताओं की देखभाल की, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।
जाम नालियां बनीं बड़ी वजह
Jaijaipur Community Health Centre Waterlogging की बड़ी वजह नगर पंचायत क्षेत्र की जाम नालियों को माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश का पानी समय पर नहीं निकल पाया, जिसके कारण गंदा पानी सीधे अस्पताल परिसर में भर गया। इस घटना ने जल निकासी व्यवस्था की तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुबह निकाला गया पानी, तब मिली राहत
Jaijaipur Community Health Centre Waterlogging की सूचना मिलने के बाद सुबह सफाईकर्मी अस्पताल पहुंचे और जमा पानी को बाहर निकालने का काम शुरू किया। कई घंटे की मशक्कत के बाद अस्पताल परिसर से पानी हटाया गया। इसके बाद मरीजों और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली, लेकिन अस्पताल में फैली गंदगी और संक्रमण की आशंका अब भी चिंता का विषय बनी हुई है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
Jaijaipur Community Health Centre Waterlogging की घटना ने बरसात के मौसम में सरकारी अस्पतालों की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर जलभराव की स्थिति नहीं बननी चाहिए। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए ताकि भविष्य में मरीजों और नवजात शिशुओं की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।



