CG news: छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2026-27 को महतारी गौरव वर्ष घोषित किया है। जानिए महिलाओं के सशक्तिकरण, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से जुड़ी बड़ी योजनाएं

0 महिला सशक्तिकरण को केंद्र में रखकर आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़!
रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को नई दिशा देने के उद्देश्य से वर्ष 2026-27 को “महतारी गौरव वर्ष” के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शुरू की गई यह पहल महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें सामाजिक व आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

राज्य सरकार का मानना है कि महिलाओं के सशक्त हुए बिना समाज और प्रदेश का समग्र विकास संभव नहीं है। इसी सोच के साथ शिक्षा, पोषण, सुरक्षा, स्वरोजगार और सामाजिक सम्मान जैसे क्षेत्रों में विशेष योजनाएं लागू की जा रही हैं।
महिला एवं बाल विकास के लिए बड़ा बजट प्रावधान
वर्ष 2026-27 के बजट में महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए 8,245 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इस राशि का उपयोग आंगनबाड़ी सेवाओं के विस्तार, पोषण योजनाओं को मजबूत करने, सामाजिक सुरक्षा और महिलाओं के लिए बुनियादी सुविधाओं के विकास में किया जाएगा।
इसके तहत नए आंगनबाड़ी केंद्रों और “महतारी सदनों” का निर्माण भी प्रस्तावित है, ताकि महिलाओं को सुरक्षित और सहयोगात्मक वातावरण मिल सके।
महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक मजबूती
राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल “महतारी वंदन योजना” के तहत लगभग 70 लाख विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। अब तक इस योजना के माध्यम से 15 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है।
सरकार का दावा है कि कई महिलाएं इस राशि का उपयोग स्वरोजगार, छोटे व्यवसाय, सब्जी उत्पादन और घरेलू उद्योग शुरू करने में कर रही हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
बेटियों के भविष्य के लिए रानी दुर्गावती योजना
बालिका सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए “रानी दुर्गावती योजना” के तहत बेटियों को 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर 1.50 लाख रुपए तक की सहायता प्रदान की जा रही है। योजना का उद्देश्य उच्च शिक्षा, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करना है।इस पहल से बेटियों के प्रति समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने की पहल
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने “मुख्यमंत्री लखपति दीदी भ्रमण योजना” शुरू की है। योजना के लिए 5 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसके माध्यम से महिलाओं को सफल उद्यमों का अनुभव और प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इसके अलावा स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हजारों महिलाओं को रियायती ऋण उपलब्ध कराया गया है। “डिजिटल सखी”, “दीदी ई-रिक्शा” और “रेडी टू ईट” जैसे मॉडल महिलाओं के लिए आय के नए अवसर तैयार कर रहे हैं।

सुरक्षा और सामाजिक सहयोग पर विशेष जोर
महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 250 “महतारी सदनों” के निर्माण के लिए 75 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। साथ ही 181 हेल्पलाइन, वन स्टॉप सेंटर और डायल-112 जैसी सेवाओं को भी मजबूत किया जा रहा है।
विधवा और जरूरतमंद महिलाओं के लिए चलाई जा रही योजनाएं उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन देने की दिशा में काम कर रही हैं।
पोषण और शिक्षा के जरिए भविष्य निर्माण
राज्य सरकार ने बच्चों, किशोरियों और गर्भवती महिलाओं के पोषण को प्राथमिकता देते हुए 500 नए आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 42 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। सरकार का लक्ष्य कुपोषण को कम करने और शुरुआती शिक्षा को मजबूत बनाने का है।
प्रेरणादायक बन रही महिलाओं की सफलता की कहानियां
प्रदेश के कई जिलों में महिलाएं स्वयं सहायता समूहों और सरकारी योजनाओं की मदद से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। बलोद सहित अन्य जिलों में महिलाओं ने खेती, लघु उद्योग और आधुनिक तकनीकों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है।
विजन 2047 के साथ जुड़ा महिला सशक्तिकरण अभियान
“महतारी गौरव वर्ष 2026” को “छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047” का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को विकास का प्रमुख आधार बनाकर राज्य को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाना है।



