Bilaspur News: हाउसिंग बोर्ड का सामुदायिक भवन तोड़वाया, 80 लाख के नुकसान पर कार्रवाई कब? कमिश्नर के आदेश के बाद भी दोषियों पर एक्शन नहीं

बिलासपुर: नेहरू नगर स्थित छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की जमीन पर बने सामुदायिक भवन को तोड़े जाने के मामले में एक माह बीत जाने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जबकि हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर अवनीश शरण ने मामले की जांच के निर्देश देते हुए भवन ध्वस्तीकरण से हुए करीब 80 लाख रुपये के नुकसान की भरपाई दोषियों से वसूलने के लिए कलेक्टर को पत्र लिखा है।
कमिश्नर ने कलेक्टर संजय अग्रवाल को भेजे पत्र में 15 बिंदुओं पर जांच कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सिटी मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारी की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई करने को कहा है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग, राजस्व विभाग और आवास एवं पर्यावरण विभाग को भी पत्र भेजा गया है।
पत्र के अनुसार, नेहरू नगर की 14.55 एकड़ भूमि वर्ष 1966 में सहकारी समिति से खरीदी गई थी, जबकि 8.31 एकड़ भूमि शासन से अधिग्रहित की गई थी। इसके बावजूद मूल मालिक छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड को नोटिस दिए बिना और उसका पक्ष सुने बिना सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से आदेश जारी कर दिया गया। आरोप है कि इसी आदेश के आधार पर 2 जून को कुछ लोगों ने 60 वर्ष पुराने सामुदायिक भवन को तोड़ना शुरू कर दिया, जिससे बोर्ड को करीब 80 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
कमिश्नर ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि मामले में भ्रामक राजस्व रिपोर्ट तैयार की गई और मानसेवी गृह निर्माण समिति तथा छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड को एक ही संस्था दर्शाने का प्रयास किया गया। ऐसे दस्तावेज तैयार करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की भी अनुशंसा की गई है।
मामला सामने आने के बाद हाउसिंग बोर्ड के हस्तक्षेप पर सिटी मजिस्ट्रेट रजनी भगत ने अपने पूर्व आदेश पर उसी दिन स्थगन (स्टे) लगा दिया। वहीं हाउसिंग बोर्ड की शिकायत पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी मोहम्मद अली के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर ने स्पष्ट रूप से जांच, जिम्मेदारी तय करने और 80 लाख रुपये की वसूली के निर्देश दिए हैं, तो एक महीने बाद भी दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? आखिर सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान की जिम्मेदारी कौन तय करेगा और प्रशासन कब जवाबदेही सुनिश्चित करेगा?


