Reg No. CG-06-0026209
IMG-20250604-WA0015-1
IMG-20250604-WA0014-1
Mukesh tiwari janjgir-champa (26 January 2026) (Page-03).jpg
Mukesh tiwari janjgir-champa (26 January 2026) (Page-02).jpg
Mukesh tiwari janjgir-champa (26 January 2026) (Page-01).jpg
छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पादेश- विदेशराज्य एवं शहररायपुर

Big News : थरूर के बड़े बोल- जरूरी है नेहरू की गलतियां स्वीकार करना, लेकिन वे हर समस्या के दोषी नहीं

तिरुवनंतपुरम: कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ लेखक शशि थरूर ने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर संतुलित लेकिन स्पष्ट बयान दिया है। थरूर ने कहा कि नेहरू की नीतियों और निर्णयों की आलोचना करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन देश की हर समस्या के लिए उन्हें अकेले जिम्मेदार ठहराना न तो न्यायसंगत है और न ही ऐतिहासिक रूप से सही।

नेहरू पर एकतरफा राजनीति ठीक नहीं
केरल विधानसभा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव (KLIBF) के चौथे संस्करण में बोलते हुए शशि थरूर ने कहा,
“मैं यह नहीं कहूंगा कि मौजूदा सरकार लोकतंत्र-विरोधी है, लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि वह नेहरू-विरोधी है।”उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू को आज की राजनीति में एक “सुविधाजनक बलि का बकरा” बना दिया गया है।

See also  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल: एक बुजुर्ग व्यक्ति के कानों में फिर से गूंजेगी आवाज, मुख्यमंत्री के निर्देश पर मात्र 2 दिनों के भीतर ही कायता के कानों में फिट किया गया डिजिटल श्रवण यंत्र...

नेहरू की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता
थरूर ने कहा कि वे नेहरू के विचारों और दृष्टिकोण की गहरी प्रशंसा करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उनकी हर नीति से बिना सवाल सहमति जताई जाए।उन्होंने कहा,“नेहरू भारतीय लोकतंत्र के संस्थापक थे। उन्होंने संस्थाओं को खड़ा किया और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूती दी।”

लेखन और पढ़ने की आदत पर निजी अनुभव साझा
अपने लेखक जीवन पर बात करते हुए शशि थरूर ने बताया कि बचपन में अस्थमा की बीमारी के कारण उनका झुकाव किताबों की ओर हुआ। उस दौर में न टेलीविजन था, न मोबाइल, इसलिए किताबें ही उनका सबसे बड़ा सहारा बनीं।
उन्होंने यह भी बताया कि उनका पहला उपन्यास बहुत कम उम्र में लिखा गया था, लेकिन स्याही गिरने से वह नष्ट हो गया।

See also  CG राज्य शासन का बड़ा फैसला : एंटी करप्शन ब्यूरो-ईओडब्लू में तीन अफसरों को डेपुटेशन पर भेजा गया

पढ़ने की संस्कृति में केरल आगे
थरूर ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में पढ़ने की आदत कम हो रही है, लेकिन केरल आज भी पढ़ने की संस्कृति में अग्रणी है। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में कम पन्नों की प्रभावशाली किताबें ज्यादा प्रासंगिक हो सकती हैं।

Advertisment

व्यंग्य लेखन और नई पीढ़ी
उन्होंने बताया कि उन्होंने The Great Indian Novel इसलिए लिखा क्योंकि उस समय भारत में व्यंग्य लेखन की कमी थी। उनकी हालिया कृति श्री नारायण गुरु की जीवनी उनकी 28वीं पुस्तक है।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!