कोटवार बने बाबू,एसडीएम कार्यालय मालखरौदा में बैठकर हल कर रहे प्रकरण, क्षेत्र की किसान जिसे भी कार्य करवाना हो उसे पोता और बेल्हाडीह के कोटवार से संपर्क करने पर ही होता है समस्या का समाधान, शासन प्रशासन जानकर भी अनजान…

सक्ति। एसडीएम की कृपा से क्षेत्र के पोता एवं बेल्हाडीह कोटवार बाबू बने हुए है। इसका नजारा रोज एसडीएम कार्यालय मालखरौदा में देखने को मिला जाएगा। जहां मेन सहायक ग्रेट 02,03 के प्रभार की जगह कोटवार बैठकर अतिबारिश या अन्य प्रकरणों का निराकरण कर रहे है, जबकि नियमानुसार कार्यों जैसे महत्वपूर्ण प्रकरणों को स्वयं एसडीएम कार्यालय के बाबू देखते है और निराकरण एसडीएम के माध्यम से किया जाता है। गैर शासकीय व्यक्ति के साथ बैठकर प्रकरणों का निराकरण हो रहा है।
एसडीएम कार्यालय में भी काम कोटवारों के हाथों में
एसडीएम कार्यालय में बाबू की जगह भी कोटवार ही कार्य कर रहे हैं। एसडीएम कोर्ट के प्रकरण कोटवार सम्मेलाल एवं रतन द्वारा देखे जा रहे है,जबकि बाबू है।क्षेत्र के लोगो द्वारा अनेको कर चुके है उसके बाद भी सरकारी रिकार्ड महत्वपूर्ण को कोटवार की हाथो है फाइलों का काम यही देख रहा है। ऐसे में प्रकरणों की गोपनियता भंग हो रही है। इसके अलावा लाभ का खेल भी चल रहा है।
यह है नियम- नियम के तहत कोटवार को हल्के में तैनात करते हैं, ताकि वहां की गतिविधियों से प्रशासन को अवगत करा सके। जरूरत होने पर उनकी ड्यूटी अन्य जगह लगाते हैं। पटवारी, राजस्व निरीक्षक द्वारा सीमांकन या अन्य भूमि विवाद संबंधित स्थानों पर कोटवार को साथ लेकर जानकारी जुटाई जाती है। यहां कोटवारों से एसडीएम कार्यालय मालखरौदा का ही काम करवाया जा रहा है जो समझ से परे हुए है और वास्तविक में बाबू के पद पर बैठे हुए है उनके पास कोई जिम्मेदारी वाला शाखा नही है जो समझ से परे हुए है।



