छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पा
कवियों ने की कविता की बरसात, देर रात तक कविता की फुलझड़ी चलती रही…

कवियों ने की कविता की बरसात
देर रात तक कविता की फुलझड़ी चलती रही
जांजगीर-चांपा। नवरात्रि के पावन पर्व में दुर्गा पंडाल बनाहिल में आयोजित कवि सम्मेलन का देर रात तक काव्य रसिको ने कविता का आनंद लिया।कवि सम्मेलन का शुभारंभ कड़ारी से पधारे कवि भानु साहू ने सरस्वती वन्दना से की। खोखरा के युवा कवि अनुभव तिवारी ने छत्तीसगढ़ की माटी के महिमा का बखान करते हुए इरखा न करते हुए आपस में प्रेम भाईचारा के साथ रहने का कविता के माध्यम से संदेश दिया। वरिष्ठ कवि अरुण तिवारी ने बरसात के दृश्य को ताजा करते हुए कविता की बरसात यू ही अपने गीतो में किया की टीपीर टीपीर गिरत हावय पानी जम्म्मो झन करत हे किसानी। कवि सम्मेलन का रसमय संचालन कर रहे व्यंग विधा के ख्यातिनाम कवि बोधीराम साहू ने चुनाव के माहौल पर अपनी बानगी भावो में इस तरह उकेरा कि चुनाव का लंदर फंदर जी का जंजाल,एक तरफ नागनाथ एक तरफ सांप नाथ समस्या विकराल। अकलतरा के गीतकार ने छत्तीसगढ़ी गुरतुर भाखा में गीत तुलसी के चौरा बर पीपर के चौरा कस की प्रस्तुति से खूब तालियां बटोरी। मौहाडीह बाराद्वार से पहुंचे कवि कौशल महंत मधुर कंठ के स्वामी ने आवा संगी जिनगी ल उजियार करना हे गीत गाकर रसमय वातावरण निर्मित किया। कवि सम्मेलन के संचालक साहू ने बीच बीच में हास्य फुलझड़ी छोड़ते रहे जिससे देर रात तक ठहाके लगते रहे। सभी कवियों का स्मृति चिन्ह, साल,श्रीफल,प्रशस्ति पत्र से सम्मान किया गया। इस दौरान समिति के पदाधिकारी व रसिक श्रोतागण देर रात तक कवि सम्मेलन का भरपूर आनंद लिए।



