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चिटफंड कंपनी के दो संचालकों को 10-10 साल का सश्रम कारावास, 23.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी में न्यायालय का बड़ा फैसला
12.5 प्रतिशत प्रतिमाह ब्याज और कम समय में रकम दोगुनी करने का दिया था लालच, दो निवेशकों से अलग-अलग किस्तों में जमा कराए थे लाखों रुपये; दोनों आरोपियों पर कुल 2-2 लाख रुपये का अर्थदण्ड भी लगाया गया

जांजगीर-चांपा। निवेशकों को कम समय में रकम दोगुनी करने और प्रतिमाह 12.5 प्रतिशत ब्याज देने का लालच देकर लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले चिटफंड कंपनी के दो संचालकों को न्यायालय ने कठोर सजा सुनाई है। मामले की सुनवाई करते हुए माननीय विशेष न्यायाधीश जयदीप गर्ग, विशेष न्यायाधीश (छत्तीसगढ़ के निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम), जांजगीर की अदालत ने आर.आर.के. पब्लिक बाजार प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की संचालक नूरजहां बेगम एवं कंपनी के सीईओ राजन रत्न कुजूर को दोषी करार दिया। न्यायालय ने दोनों आरोपियों को छत्तीसगढ़ के निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम की धारा 10 के तहत 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं एक-एक लाख रुपये के अर्थदण्ड से दंडित किया है। वहीं भारतीय दंड संहिता की धारा 420/34 के तहत भी दोनों को 7-7 वर्ष का सश्रम कारावास एवं एक-एक लाख रुपये के अर्थदण्ड की सजा सुनाई गई है।
निवेश पर भारी ब्याज और रकम दोगुनी करने का दिया था प्रलोभन
लोक अभियोजक संदीप सिंह बनाफर के अनुसार, इस मामले में प्रार्थी डिकेश्वर प्रसाद साहू ने थाना बाराद्वार में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक अक्टूबर 2023 में ग्राम लवसरा में अगरबत्ती बेचने आई नैना महंत के माध्यम से उसकी पहचान आर.आर.के. पब्लिक बाजार प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से हुई थी। कंपनी की ओर से निवेशकों को आकर्षक ब्याज देने और बहुत कम समय में जमा पूंजी दोगुनी करने का भरोसा दिलाया गया था। कंपनी के झांसे में आकर प्रार्थी ने स्वयं की 12 लाख 50 हजार रुपये की राशि निवेश की। इसके अलावा गरीबदास महंत के 11 लाख रुपये भी कंपनी में विभिन्न किस्तों के माध्यम से जमा कराए गए। इस तरह दोनों निवेशकों ने कुल 23 लाख 50 हजार रुपये कंपनी में निवेश किए थे।
कंपनी की ओर से निवेश की गई रकम पर प्रतिमाह 12.5 प्रतिशत ब्याज देने और निर्धारित कम समय में मूलधन दोगुना करने का आश्वासन दिया गया था। निवेशकों ने कंपनी के वादों पर भरोसा कर अपनी मेहनत की कमाई जमा कर दी, लेकिन निर्धारित समयावधि पूरी होने के बाद भी उन्हें न तो आश्वासन के मुताबिक ब्याज मिला और न ही उनकी मूल निवेश राशि वापस की गई। इसके बाद निवेशकों को अपने साथ धोखाधड़ी होने का एहसास हुआ और मामले की शिकायत पुलिस से की गई।
बाराद्वार थाने में दर्ज हुआ था धोखाधड़ी का मामला
पीड़ित की शिकायत पर थाना बाराद्वार में अपराध क्रमांक 296/24 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 34 तथा छत्तीसगढ़ के निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम की धारा 10 के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर पुलिस ने विवेचना शुरू की। जांच के दौरान कंपनी की संचालक नूरजहां बेगम एवं कंपनी के सीईओ राजन रत्न कुजूर की भूमिका सामने आई। पुलिस ने मामले से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों का संकलन कर दोनों आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया।
10 गवाहों के बयान और 29 प्रकार के दस्तावेजी साक्ष्य बने सजा का आधार
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपों को प्रमाणित करने के लिए प्रभावी ढंग से पक्ष रखा। अभियोजन की ओर से न्यायालय में कुल 10 साक्षियों के बयान कराए गए। इसके साथ ही 29 प्रकार के दस्तावेजी साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए। गवाहों के कथनों और दस्तावेजों के आधार पर न्यायालय ने पूरे मामले का परीक्षण किया। प्रस्तुत साक्ष्यों से निवेशकों के साथ धोखाधड़ी किए जाने के आरोप प्रमाणित होने पर न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया।
दो अलग-अलग धाराओं में सुनाई गई सजा
माननीय विशेष न्यायालय ने आरोपी नूरजहां बेगम एवं राजन रत्न कुजूर को भारतीय दंड संहिता की धारा 420/34 के तहत 7-7 वर्ष का सश्रम कारावास तथा एक-एक लाख रुपये के अर्थदण्ड से दंडित किया है। वहीं छत्तीसगढ़ के निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम की धारा 10 के तहत दोनों आरोपियों को 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं एक-एक लाख रुपये के अर्थदण्ड की सजा सुनाई गई है।
न्यायालय ने अर्थदण्ड की राशि जमा नहीं करने की स्थिति में धारा 420/34 के तहत 7-7 माह तथा निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम की धारा 10 के तहत 10-10 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतने का आदेश भी दिया है।
इस फैसले के साथ ही निवेशकों को अधिक ब्याज और कम समय में रकम दोगुनी करने का लालच देकर उनकी मेहनत की कमाई हड़पने वाली चिटफंड कंपनियों के खिलाफ एक कड़ा संदेश गया है। न्यायालय का यह फैसला उन निवेशकों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो आकर्षक ब्याज और कम समय में अधिक मुनाफे के प्रलोभन में आकर अपनी जमा पूंजी ऐसी कंपनियों में निवेश कर देते हैं।



