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छात्र आंदोलन के आगे नहीं टिक पाए धर्मेंद्र प्रधान! आखिरकार क्यों झुकी मोदी सरकार?

Dharmendra Pradhan Resignation: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश की राजनीति का सबसे चर्चित विषय बन गया है। लंबे समय तक केंद्र सरकार के अहम मंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक सफर संगठन, चुनावी जीत और कई बड़े मंत्रालयों की जिम्मेदारी से भरा रहा। लेकिन छात्र आंदोलन और NEET विवाद के बीच उनका नाम लगातार चर्चा में रहा।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चर्चा में आने के साथ उनका पूरा राजनीतिक जीवन भी लोगों के सामने आ गया है। ओडिशा के तालचर में जन्मे धर्मेंद्र प्रधान ने छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से राजनीति की शुरुआत की। संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद वे भारतीय जनता पार्टी के युवा नेताओं में शामिल हुए।इसके बाद उन्होंने ओडिशा की राजनीति में अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2000 में विधायक बने और फिर 2004 में लोकसभा पहुंचे। बाद में वे राज्यसभा सदस्य भी रहे और पार्टी संगठन में लगातार मजबूत होते गए।

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मोदी सरकार के भरोसेमंद मंत्री बने
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इसलिए भी बड़ी खबर माना जा रहा है क्योंकि वे मोदी सरकार के शुरुआती कार्यकाल से लगातार केंद्रीय मंत्री रहे। वर्ष 2014 में उन्हें पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली।उनके कार्यकाल में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना देश की सबसे चर्चित योजनाओं में शामिल रही। इसके बाद उन्होंने इस्पात मंत्रालय, कौशल विकास मंत्रालय और फिर शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाला। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को लागू कराने में भी उनकी अहम भूमिका रही।

NEET विवाद के बाद बढ़ा दबाव
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय आया जब NEET परीक्षा को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया। इसी बीच CJP और अन्य छात्र संगठनों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रखा और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की।विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठाया। लगातार हंगामे और बढ़ते राजनीतिक दबाव के कारण यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

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संसद से सड़क तक विरोध
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल छात्र आंदोलन तक सीमित नहीं रहा। संसद के दोनों सदनों में भी विपक्ष ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। कई दिनों तक कार्यवाही बाधित रही। दूसरी ओर देश के कई राज्यों में भी छात्रों के प्रदर्शन की खबरें सामने आईं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब विरोध लगातार बढ़ता गया तो सरकार पर दबाव भी बढ़ने लगा।

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क्या रहे इस्तीफे के प्रमुख कारण?
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा कई कारणों से चर्चा में रहा। प्रमुख वजहों में छात्र आंदोलन, विपक्ष का लगातार दबाव, NEET परीक्षा विवाद, परीक्षा प्रणाली को लेकर उठे सवाल और सरकार की छवि पर पड़ रहा असर शामिल बताए जा रहे हैं।साथ ही यह भी कहा गया कि छात्रों से संवाद की कमी और बढ़ते जनदबाव ने स्थिति को और कठिन बना दिया।

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राजनीतिक सफर हमेशा रहेगा चर्चा में
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भले ही उनके मंत्री पद का अंत माना जा रहा हो, लेकिन भारतीय राजनीति में उनका योगदान लंबे समय तक चर्चा का विषय रहेगा। छात्र राजनीति से लेकर केंद्रीय मंत्री बनने तक उनका सफर संगठनात्मक राजनीति का एक बड़ा उदाहरण माना जाता है।अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि भाजपा नेतृत्व उनकी अगली राजनीतिक भूमिका क्या तय करता है और शिक्षा मंत्रालय में आगे क्या बदलाव देखने को मिलते हैं।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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