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छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पादेश- विदेशराज्य एवं शहररायपुर

Raipur Airport Case: रायपुर एयरपोर्ट पर किसान का दावा: ‘मेरी जमीन पर बनी है टर्मिनल बिल्डिंग’; सुप्रीम कोर्ट से मांगा ₹3,500 करोड़ का मुआवजा

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक बेहद हैरान और कौतूहल पैदा करने वाला कानूनी मामला सामने आया है। यहां के एक 10वीं पास साधारण किसान अश्विनी बांधे ने दावा किया है कि रायपुर का ‘स्वामी विवेकानंद इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ जिस जमीन पर खड़ा है, वह उनके पूर्वजों की है। किसान का दावा है कि एयरपोर्ट की मुख्य टर्मिनल बिल्डिंग और उसके ठीक सामने बना खूबसूरत गार्डन उनकी पैतृक भूमि पर निर्मित है। इस मामले को लेकर वे अब देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) पहुंच गए हैं, जहां उन्होंने जमीन के बदले करीब साढ़े 3 हजार करोड़ रुपये (€3,500 Crore) के भारी-भरकम मुआवजे की मांग की है।

30 एकड़ से ज्यादा जमीन और 35 साल की तपस्या

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किसान अश्विनी बांधे के मुताबिक, कुल 30 एकड़ 18 डिस्मिल जमीन को लेकर उनका यह दावा है। इस विशालकाय मुआवजे की राशि में जमीन का बकाया किराया, पिछले कई दशकों का ब्याज और अन्य कानूनी दावे शामिल हैं। यह कोई रातों-रात किया गया दावा नहीं है, बल्कि इसके पीछे अश्विनी बांधे की 35 साल की कड़ी मेहनत है। वे पिछले साढ़े तीन दशकों से सरकारी रिकॉर्ड रूम, धूल खानी पुरानी फाइलों, मंत्रालयों के गोपनीय दस्तावेजों और पुराने कानूनों की किताबों को खंगाल रहे हैं। बांधे का कहना है कि उन्होंने पिछले 35 साल में जितना वक्त अपने खेतों में फसल उगाने में नहीं बिताया, उससे कहीं ज्यादा वक्त अदालतों, पुस्तकालयों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने में गुजारा है।

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“जो गूगल पर नहीं मिलेगा, वो रिकॉर्ड मेरे पास हैं”

अश्विनी बांधे अपने दावों को लेकर बेहद आश्वस्त नजर आते हैं। उनका कहना है कि सरकारी फाइलें आम लोगों के लिए महज रद्दी कागज हो सकती हैं, लेकिन उनके लिए यह उनकी पूरी जिंदगी की जमापूंजी है। उनके पास ऐसे पुख्ता और दुर्लभ सरकारी रिकॉर्ड व दस्तावेज मौजूद हैं, जिन्हें सामान्य तौर पर ढूंढ पाना नामुमकिन है। वे गर्व से कहते हैं, ‘मेरे पास ऐसी फाइलें और साक्ष्य हैं, जो आज के दौर में गूगल पर खोजने से भी नहीं मिलेंगी।’

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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट पर नजर

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इस हाई-प्रोफाइल मामले में इस साल छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मोड़ देते हुए संबंधित पक्षों को पूरे मामले की दोबारा से गहन जांच करने के निर्देश दिए थे। हाई कोर्ट के इस रुख के बाद अश्विनी बांधे ने न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अब इस ऐतिहासिक और अरबों रुपये के जमीन विवाद की पूरी उम्मीद सर्वोच्च न्यायालय के आने वाले फैसले पर टिकी हुई है। यदि अदालत का फैसला किसान के पक्ष में आता है, तो यह भारतीय विमानन इतिहास और भूमि अधिग्रहण के मामलों में अब तक का सबसे बड़ा और अनोखा फैसला होगा।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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