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कोर्ट के आदेश की अवहेलना पड़ी भारी: ROC मुंबई के उप रजिस्ट्रार और बीमा कंपनी के विधि अधिकारी को प्रधान जिला न्यायाधीश की कड़ी फटकार, एमडी को जेल भेजने की चेतावनी

मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले में भुगतान टालने पर कोर्ट सख्त, 15 दिन में आदेश का पालन नहीं हुआ तो गिरफ्तारी वारंट और सिविल जेल की कार्रवाई होगी।
जांजगीर-चांपा। मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण में न्यायालय द्वारा पारित क्षतिपूर्ति (अवॉर्ड) राशि के भुगतान में लगातार लापरवाही और न्यायालयीन आदेश की अनदेखी करना बीमा कंपनी तथा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) मुंबई के अधिकारियों को भारी पड़ गया। प्रधान जिला न्यायाधीश जयदीप गर्ग ने मामले की सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए ROC मुंबई के उप रजिस्ट्रार और बीमा कंपनी के विधि अधिकारी को न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से तलब किया तथा भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न करने की सख्त चेतावनी दी।
मुआवजा राशि के भुगतान में बरती जा रही थी लापरवाही
मामला एक मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें न्यायालय ने मृतक के पीड़ित परिवार के पक्ष में क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने का आदेश पारित किया था। इसके बावजूद संबंधित बीमा कंपनी सेम्पो यूनिवर्सल द्वारा भुगतान में लगातार टालमटोल की जा रही थी। न्यायालय ने राशि की वसूली सुनिश्चित करने के लिए कंपनी की संपत्ति पर चार्ज (प्रभार) सृजित करने हेतु रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) मुंबई को आधिकारिक पत्र भेजा था।
ROC ने जताई असमर्थता, शुरू हुई अवमानना की कार्रवाई
बताया गया कि ROC मुंबई ने न्यायालय के आदेश का पालन करने में असमर्थता व्यक्त कर दी। इसके बाद पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता राजन फुलर ने न्यायालय में अवमानना याचिका प्रस्तुत की। मामले को गंभीर मानते हुए न्यायालय ने ROC मुंबई के विरुद्ध न्यायालयीन आदेश की अवमानना की कार्यवाही प्रारंभ करने के आदेश जारी कर दिए।
अवमानना आदेश के बाद मचा हड़कंप, अधिकारी पहुंचे कोर्ट
अवमानना की कार्यवाही शुरू होते ही संबंधित विभागों में हड़कंप मच गया। इसके बाद ROC मुंबई के उप रजिस्ट्रार अरुण कुमार सिंह को मुंबई से व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होना पड़ा। वहीं बीमा कंपनी के विधि अधिकारी देशवंत मेहर भी रायपुर से तलब किए जाने पर न्यायालय में पेश हुए।
प्रधान जिला न्यायाधीश ने लगाई कड़ी फटकार
सुनवाई के दौरान प्रधान जिला न्यायाधीश जयदीप गर्ग ने दोनों अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिया कि न्यायालय के आदेश का अक्षरशः पालन करते हुए मृतक के पीड़ित परिवार को तत्काल क्षतिपूर्ति राशि उपलब्ध कराई जाए और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई न जाए।
माफी मांगने पर मिली सशर्त राहत
न्यायालय के कड़े रुख को देखते हुए ROC मुंबई के उप रजिस्ट्रार और बीमा कंपनी के विधि अधिकारी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए न्यायालय से लिखित एवं मौखिक रूप से क्षमा याचना की। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि आगे ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होगी। इसके बाद न्यायालय ने उन्हें सशर्त माफी देते हुए आदेश के पूर्ण पालन के लिए अंतिम रूप से 15 दिनों का समय प्रदान किया।
समय सीमा में पालन नहीं हुआ तो एमडी जाएंगे सिविल जेल
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित 15 दिनों के भीतर क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान और आदेश का पूर्ण पालन नहीं किया गया तो ROC मुंबई के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही संबंधित बीमा कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर उन्हें सिविल जेल भेजने की कार्रवाई भी की जाएगी।
यह मामला न्यायालयीन आदेशों की अवहेलना पर न्यायपालिका के सख्त रुख का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। साथ ही यह संदेश भी देता है कि पीड़ितों को न्याय दिलाने में किसी भी प्रकार की लापरवाही या आदेशों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों और संस्थाओं के खिलाफ न्यायालय कठोर कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।


