कोरबा कलेक्टर जनदर्शन में गूंजा गोबरूराम भतरा का फर्जीवाड़ा, उप-पंजीयक की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल

- वरिष्ठ अधिकारियों के संरक्षण में ठंडे बस्ते में डाली जा रही शिकायत? निलंबन और कानूनी कार्रवाई की मांग!
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में शासकीय विभागों के भीतर भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। उप-पंजीयक सहकारी संस्थाएं’ कार्यालय में पदस्थ एक वरिष्ठ अधिकारी पर फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी और पदोन्नति पाने का गंभीर आरोप लगा है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है,आखिर क्यों लिखित शिकायत के हफ्तों बाद भी इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया?
क्या है पूरा मामला?
शिकायत पत्र के अनुसार आवेदक ने जिला दण्डाधिकारी कलेक्टर कोरबा के समक्ष वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक गोबरूराम भतरा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है l शिकायत के मुताबिक गोबरूराम मूल रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग ोब्स से आते हैं। इसके बावजूद उन्होंने भतरा ST – अनुसूचित जनजाति के उपनाम का गलत लाभ उठाकर शासकीय सेवा और पदोन्नति प्रमोशन हासिल कर लिया है।
अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लग रहा है,इससे पहले 29 मई 2026 को उप-पंजीयक, सहकारी संस्थाएं जिला कोरबा के समक्ष इस फर्जीवाड़े की लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी। लेकिन पर्याप्त समय बीत जाने के बाद भी विभाग ने कोई प्रारंभिक जांच तक शुरू नहीं की और न ही सेवा पुस्तिका या मूल दस्तावेज जब्त किए।बड़ा सवाल यही है इसे क्या समझा जाए?शिकायतकर्ता ने सीधे तौर पर विभागीय अधिकारियों की नीयत पर उंगली उठाई है।
शिकायतकर्ता का आरोप है,विभाग द्वारा मामले को दबाना सीधे तौर पर यह दर्शाता है कि जिम्मेदार अधिकारी दोषी कर्मचारी को संरक्षण दे रहे हैं। कार्रवाई न होने से आरोपी को विभागीय रिकॉर्ड और सेवा पुस्तिका के साथ छेड़छाड़ करने का पूरा अवसर मिल रहा है, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत एक गंभीर प्रशासनिक कदाचार है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आवेदक ने जिला दण्डाधिकारी से निम्नलिखित सख्त कदम उठाने का आग्रह किया है l
शासकीय कर्तव्यों में लापरवाही बरतने और शिकायत को दबाने के आरोप में संबंधित उप-पंजीयक सहकारी संस्थाएं जिला कोरबा पर भी कार्रवाई की किया जाए।
मुख्य अनावेदक गोबरूराम भतरा की सेवा पुस्तिका एवं नियुक्ति दस्तावेज तत्काल ज़ब्त कर मामले को उच्च स्तरीय छानबीन समिति को भेजा जाए, साथ ही दोषी कर्मचारी के साथ-साथ उसे बचाने वाले व्हाइट कॉलर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भी सख्त विभागीय एवं कानूनी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित हो, ताकि न्याय व्यवस्था पर आम जनता का विश्वास बना रहे।



