साहू से ‘भतरा’ बन हथियाई सरकारी नौकरी, पदोन्नति भी पाई,अब खुली पोल, बर्खास्तगी की मांग? आरक्षण पर डाका, ओबीसी वर्ग के गोबरू राम ने फर्जी एसटी ST प्रमाण पत्र के सहारे 33 सालों तक शासन को गुमराह करने की खबर?

कोरबा। सरकारी नौकरी और पदोन्नति के लालच में जाति बदलकर व्यवस्था को चूना लगाने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। मामला जिला कोरबा के सहकारी संस्थाएं कार्यालय से जुड़ा है, जहां मूल रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग OBC/साहू से ताल्लुक रखने वाले एक कर्मचारी द्वारा फर्जी तरीके से अनुसूचित जनजाति ST का प्रमाण पत्र बनवाकर न सिर्फ नौकरी हासिल करने बल्कि उच्च पद पर पदोन्नति पाने का भी सनसनीखेज मामला सामने आया है।
इस संबंध में सजग नागरिक राजकुमार ठाकुर द्वारा उप-पंजीयक सहकारी संस्थाएं, जिला कोरबा को एक लिखित और नामजद शिकायत सौंपकर त्वरित कार्रवाई की मांग जल्द जी किए जाने की खबर है।
क्या है पूरा मामला समझते हैं ?
जानकारी के अनुसार वर्तमान में कार्यालय उप-पंजीयक कोरबा में वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक के पद पर कार्यरत गोबरूराम भतरा की प्रथम नियुक्ति 23 जून 1993 को अनुसूचित जनजाति ST वर्ग के अंतर्गत उप-अंकेक्षक के पद पर हुई थी। वर्तमान में वे इसी आरक्षित श्रेणी का लाभ उठाकर प्रमोट भी हो चुके हैं।
सूचना के अधिकार RTI से प्राप्त दस्तावेजों और जानकारियों के आधार पर शिकायतकर्ता ने खुलासा किया है कि गोबरूराम मूल रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग OBC समाज से आते हैं। उन्होंने केवल नौकरी और तरक्की के लालच में अपने नाम के आगे भतरा यानी ST उपनाम का गलत इस्तेमाल किया और फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए जो पूरी तरह से असत्य और कूटरचित हैं।
वास्तविक हकदार के संवैधानिक अधिकारों का हनन
आरोप है कि अनावेदक ने एक वास्तविक अनुसूचित जनजाति के पात्र उम्मीदवार का हक मारकर उसके संवैधानिक अधिकारों का हनन किया है। जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम एवं आरक्षण नियमों के तहत गलत जानकारी देकर शासकीय सेवा प्राप्त करना सेवा से तत्काल बर्खास्तगी Dismissal का पुख्ता आधार है।
गोबरूराम भतरा की सेवा पुस्तिका Service Book एवं नियुक्ति के समय प्रस्तुत मूल जाति प्रमाण पत्र को तत्काल ज़ब्त कर उच्च स्तरीय छानबीन समिति High-Power Scrutiny Committee को सत्यापन हेतु भेजा जाए और जांच लंबित रहने तक उन्हें पद से निलंबित किया जाए ताकि वे विभागीय रिकॉर्ड और सबूतों के साथ कोई छेड़छाड़ न कर सकें।
कार्रवाई उपरांत दोष सिद्ध होने पर उनकी पूरी सेवा अवधि के दौरान प्राप्त वेतन एवं भत्तों की शत-प्रतिशत वसूली की जाए और उनके खिलाफ धोखाधड़ी का आपराधिक प्रकरण (FIR) दर्ज कराया जाने की मांग की जाएगी l
मामले को लेकर जल्द ही लिखित शिकायत के कयास लगाए जा रहे है, इस मामले की सुगबुगाहट के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर फर्जीवाड़े पर कितनी जल्दी और कितनी सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करता है।



