Ebola Virus Outbreak Congo : कांगो में इबोला का खतरनाक रूप से फैला! 87 मौतों के बाद WHO ने घोषित की हेल्थ इमरजेंसी

Ebola Virus Outbreak Congo ने एक बार फिर पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) के पूर्वी इतूरी प्रांत में इबोला वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। अब तक कम से कम 87 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 300 से ज्यादा संदिग्ध मामलों की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य एजेंसियों में हड़कंप मच गया है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO Alert जारी कर इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर चुका है।
युगांडा तक पहुंचा संक्रमण
Africa Health Crisis अब केवल कांगो तक सीमित नहीं रह गया है। पड़ोसी देश युगांडा में भी इबोला संक्रमण के मामले सामने आने लगे हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक वहां एक संक्रमित मरीज की मौत भी हो चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही और कमजोर स्वास्थ्य ढांचा संक्रमण को तेजी से फैलाने का बड़ा कारण बन सकता है।
बुंडीबुग्यो स्ट्रेन बना नई चिंता
इस बार फैल रहा इबोला वायरस मुख्य रूप से Bundibugyo Virus स्ट्रेन से जुड़ा बताया जा रहा है। यह इबोला वायरस का एक खतरनाक प्रकार माना जाता है, जो संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी, पसीने और अन्य बॉडी फ्लूइड्स के संपर्क में आने से संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ जाता है।
WHO ने क्यों घोषित की हेल्थ इमरजेंसी?
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कांगो और उसके सीमावर्ती देशों में संक्रमण का जोखिम लगातार बढ़ रहा है। इसी वजह से Global Health Emergency घोषित की गई है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से सहायता और निगरानी बढ़ाई जा सके।
WHO का कहना है कि यदि समय रहते संक्रमण पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो यह कई अफ्रीकी देशों में गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकता है।
स्क्रीनिंग और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग तेज
Ebola Prevention Measures के तहत कांगो और युगांडा में बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग अभियान चलाए जा रहे हैं।संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए लोगों की पहचान करने के लिए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग तेज कर दी गई है। स्वास्थ्य टीमें गांव-गांव जाकर लोगों की जांच कर रही हैं और संदिग्ध मरीजों को अलग रखा जा रहा है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ा दबाव
लगातार बढ़ते मामलों ने स्थानीय अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव डाल दिया है।कई इलाकों में मेडिकल स्टाफ की कमी और सीमित संसाधनों के कारण हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना भी स्वास्थ्य एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
दुनिया क्यों हुई सतर्क?
International Health News के अनुसार इबोला वायरस की मृत्यु दर काफी ज्यादा मानी जाती है। यही वजह है कि WHO समेत कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना महामारी के बाद दुनिया अब किसी भी नए संक्रमण को लेकर ज्यादा सतर्क हो चुकी है। ऐसे में इबोला के बढ़ते मामलों ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।
क्या भारत पर भी हो सकता है असर?
फिलहाल भारत में इबोला संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय यात्रा और वैश्विक संपर्क को देखते हुए स्वास्थ्य एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमित देशों से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग और निगरानी जरूरी है ताकि किसी भी संभावित खतरे को रोका जा सके।



