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तीसरी बार शराब पीकर गाड़ी चलाना पड़ा भारी: कोर्ट ने सुनाई अनोखी सजा, अब 30 दिन करेगा थाने की सफाई और लोगों को करेगा जागरूक

जांजगीर-चांपा। सड़क सुरक्षा को लेकर जांजगीर की अदालत ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जो न सिर्फ शराब पीकर वाहन चलाने वालों के लिए कड़ा संदेश है, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने की भी मिसाल बनेगा। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जांजगीर ने शराब के नशे में वाहन चलाने वाले चालक स्वदेश यादव (38 वर्ष), निवासी पाण्डेय नगर, जांजगीर को 15 हजार रुपये के जुर्माने के साथ 30 दिनों की सामुदायिक सेवा की सजा सुनाई है।
न्यायालय के आदेश के अनुसार आरोपी को 22 जुलाई 2026 से लगातार 30 दिनों तक प्रतिदिन तीन घंटे थाना कोतवाली जांजगीर में साफ-सफाई करनी होगी। इसके साथ ही उसे जिले के विभिन्न चौक-चौराहों पर लोगों को शराब का सेवन नहीं करने और शराब पीकर वाहन नहीं चलाने के लिए जागरूक भी करना होगा।
दो बार पहले भी पकड़ा गया, फिर नहीं सुधरा चालक
जानकारी के अनुसार स्वदेश यादव इससे पहले भी दो बार शराब पीकर वाहन चलाते हुए पकड़ा जा चुका था। दोनों मामलों में न्यायालय द्वारा उस पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया था। बावजूद इसके उसने अपनी गलती नहीं सुधारी और तीसरी बार फिर नशे की हालत में वाहन चलाते हुए यातायात पुलिस की कार्रवाई की जद में आ गया। इस बार अदालत ने केवल जुर्माना लगाने के बजाय समाजोपयोगी दंड देकर कड़ा संदेश दिया।
यातायात पुलिस की कार्रवाई के बाद पहुंचा मामला कोर्ट
पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय (IPS) के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) उदयन बेहार के नेतृत्व में जिले में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए शराबी वाहन चालकों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
इसी अभियान के दौरान यातायात पुलिस ने स्वदेश यादव को शराब के नशे में वाहन चलाते हुए पकड़ा। वाहन को जब्त कर उसके खिलाफ मोटर यान अधिनियम की धारा 185 के तहत कार्रवाई करते हुए प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
कोर्ट का संदेश: दंड के साथ समाज के प्रति जिम्मेदारी भी
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। इसी उद्देश्य से आरोपी को आर्थिक दंड के साथ सामुदायिक सेवा का आदेश दिया गया, ताकि वह स्वयं भी अपनी गलती का एहसास करे और दूसरों को भी शराब पीकर वाहन नहीं चलाने के लिए प्रेरित करे।
अब अगले एक महीने तक आरोपी थाना कोतवाली
परिसर की साफ-सफाई करेगा और शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर लोगों को सड़क सुरक्षा तथा नशे में वाहन चलाने के खतरों के प्रति जागरूक करेगा।
सड़क सुरक्षा के लिए नजीर बना फैसला
जांजगीर न्यायालय का यह फैसला जिले में पहली बार इस तरह की समाजोपयोगी सजा के रूप में देखा जा रहा है। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे निर्णय केवल दोषियों को दंडित ही नहीं करते, बल्कि समाज में जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश भी देते हैं। वहीं पुलिस अधिकारियों ने भी इसे सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।



