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Gariaband News : पैर में गिरकर मांगा घर: शर्मनाक! राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र को पैर में गिरकर मांगना पड़ रहा घर, सुशासन तिहार में पति-पत्नी ने कर दिया भावुक, देखें वीडियो

गरियाबंद। जिले में चल रहे सुशासन तिहार के दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर उजागर कर दिया। देवभोग विकासखंड के माड़ागांव में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम में विशेष पिछड़ी जनजाति कमार समाज के कई परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना की मांग को लेकर जिला पंचायत सीईओ के सामने दंडवत होते नजर आए। किसी ने पैर पकड़कर अपनी पीड़ा सुनाई तो कोई जमीन पर लेटकर गुहार लगाता दिखाई दिया। यह दृश्य देखकर कार्यक्रम में मौजूद लोग भी भावुक हो उठे।

जानकारी के मुताबिक देवभोग विकासखंड के बरही गांव में रहने वाले कमार जनजाति के परिवार लंबे समय से प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ से वंचित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से जर्जर और कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं। बरसात के दिनों में उनके घरों में पानी टपकता है और कई परिवार असुरक्षित परिस्थितियों में जीवन गुजार रहे हैं। बावजूद इसके अब तक उन्हें पक्के मकान की सुविधा नहीं मिल पाई है।

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सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान जब जिला पंचायत सीईओ ग्रामीणों की समस्याएं सुन रहे थे, तब कमार समाज के परिजन अचानक उनके सामने पहुंच गए। कुछ महिलाएं और बुजुर्ग जमीन पर दंडवत होकर मदद की गुहार लगाने लगे। ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने कई बार आवेदन दिए, पंचायत और जनपद स्तर पर भी अपनी समस्या रखी, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि पात्र होने के बावजूद उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में शामिल नहीं किया गया।

इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेष पिछड़ी जनजाति कमार समाज को देश में अत्यंत संवेदनशील और संरक्षण योग्य समुदाय माना जाता है। इन्हें अक्सर “राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र” के रूप में भी उल्लेखित किया जाता है, क्योंकि सरकार इनके संरक्षण और विकास के लिए विशेष योजनाएं चलाने का दावा करती रही है। ऐसे में अगर इन्हीं समुदायों के लोगों को बुनियादी आवास के लिए अधिकारियों के सामने दंडवत होना पड़े, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

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कार्यक्रम में मौजूद कई लोगों ने भी इस दृश्य पर चिंता जताई। ग्रामीणों का कहना था कि सरकार लगातार योजनाओं के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन और अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर अब भी कई जरूरतमंद परिवार सरकारी योजनाओं से वंचित हैं। लोगों का यह भी कहना है कि अगर सुशासन तिहार जैसे कार्यक्रमों में भी गरीबों को इस तरह अपनी बात मनवाने के लिए दंडवत होना पड़े, तो यह व्यवस्था की संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल है।

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हालांकि प्रशासन की ओर से मामले में जांच कराने और पात्र हितग्राहियों को नियमानुसार प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने का आश्वासन दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि संबंधित परिवारों के दस्तावेजों और पात्रता की समीक्षा की जाएगी। यदि वे योजना के नियमों के अनुसार पात्र पाए जाते हैं, तो उन्हें जल्द लाभ दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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