छत्तीसगढ़ में जल संकट पर सख्ती! 1 हफ्ते में सभी हैंडपंप और बोरवेल जांचने के निर्देश

रायपुर : बढ़ती गर्मी और गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए छत्तीसगढ़ में पेयजल संकट की आशंका गहराने लगी है। इसी को लेकर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।
हैंडपंप और बोरवेल की एक सप्ताह में जांच अनिवार्य
विभाग ने आदेश दिया है कि सभी निकाय अपने क्षेत्र में मौजूद हैंडपंप, बोरवेल और जल आपूर्ति प्रणालियों की एक सप्ताह के भीतर जांच करें। खराब व्यवस्था की तत्काल मरम्मत की जाए ताकि किसी भी वार्ड में पानी की समस्या न हो।
जल गुणवत्ता और क्लोरीन जांच पर विशेष फोकस
निर्देशों में कहा गया है कि पेयजल में क्लोरीन की मात्रा की नियमित जांच होनी चाहिए। साथ ही ओवरहेड टैंकों में रि-क्लोरीनेशन और ब्लीचिंग पाउडर का उपयोग अनिवार्य किया गया है। जल शोधन संयंत्रों की सफाई भी सुनिश्चित करने को कहा गया है।
नोडल अधिकारी करेंगे रोजाना समीक्षा
सभी नगर निकायों में आयुक्त और मुख्य नगर पालिका अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है। इन्हें रोजाना पेयजल शिकायतों की समीक्षा कर तुरंत समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्याऊ और टैंकर व्यवस्था बढ़ाने के निर्देश
बस स्टैंड, बाजार और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में प्याऊ घर स्थापित करने के साथ मानव संसाधन भी तैनात करने को कहा गया है। जरूरत पड़ने पर जल टैंकर सेवा बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
जल संरक्षण और रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर जोर
सरकार ने भू-जल स्तर सुधारने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग और रिचार्ज पिट अनिवार्य किए हैं। सभी जल स्रोतों के पास जल पुनर्भरण व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जन जागरूकता अभियान भी चलेगा
हर वार्ड में जल संरक्षण जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसमें जनप्रतिनिधियों, NGOs और सामाजिक संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।छत्तीसगढ़ सरकार ने साफ कर दिया है कि गर्मी के दौरान पेयजल संकट किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी निकायों को 15 दिनों के भीतर व्यवस्थाएं सुधारने और स्थायी समाधान लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।



