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पाकिस्तान का गजब तमाशा! खुद के स्कूल-यूनिवर्सिटी के पते नहीं… जामिया पर बांट रहे फ़ोकट ज्ञान

नई दिल्ली : दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रस्तावित “युवा कुंभ” कार्यक्रम को लेकर कैंपस में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद अब पाकिस्तान की टिप्पणी ने इस मामले को और राजनीतिक बना दिया है।

यह कार्यक्रम 28 अप्रैल को जामिया के FET ऑडिटोरियम में आयोजित किया जाना था। कार्यक्रम RSS के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में प्रस्तावित था, लेकिन आयोजन शुरू होने से पहले ही छात्र संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया।

छात्र संगठनों ने किया प्रदर्शन

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) समेत कई छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया और प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाए।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप था कि RSS जैसे संगठन को विश्वविद्यालय परिसर में कार्यक्रम की अनुमति देना संस्थान की धर्मनिरपेक्ष पहचान के खिलाफ है।

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छात्रों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को राजनीतिक और सांप्रदायिक विचारधारा फैलाने का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए।

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पाकिस्तान की टिप्पणी से बढ़ा विवाद

मामले ने अंतरराष्ट्रीय रंग तब ले लिया जब पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने इस घटना पर बयान जारी किया।उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए उन्हें इस मामले की जानकारी मिली और यह “दुर्भाग्यपूर्ण” है। अंद्राबी ने आरोप लगाया कि भारत में कट्टरपंथी विचारधारा अब शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंच रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि जामिया मिलिया इस्लामिया जैसे संस्थान की एक ऐतिहासिक और शैक्षणिक पहचान रही है, इसलिए वहां इस तरह के कार्यक्रम चिंता का विषय हैं।

भारत को नसीहत देने पर उठे सवाल

पाकिस्तान की ओर से दिए गए बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।कई लोगों ने सवाल उठाया कि जिस पाकिस्तान में खुद अल्पसंख्यकों और धार्मिक समुदायों पर हमलों की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं, वह भारत को धार्मिक सहिष्णुता और अधिकारों पर सलाह कैसे दे सकता है।

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पाकिस्तान ने अपने बयान में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस मामले पर ध्यान देने की अपील की और भारत से कथित नफरत फैलाने वाले बयानों को रोकने की बात कही।

AISA ने लगाए दोहरे रवैये के आरोप

AISA और अन्य छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन आम छात्र संगठनों के कार्यक्रमों को अनुमति देने में सख्ती दिखाता है, जबकि RSS को मंच उपलब्ध कराया गया।

छात्र नेताओं का कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी प्रकार की सांप्रदायिक राजनीति को जगह नहीं मिलनी चाहिए।उन्होंने दावा किया कि ऐसे आयोजनों से देश के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और शैक्षणिक माहौल पर असर पड़ता है।

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राजनीतिक और शैक्षणिक बहस तेज

जामिया में RSS कार्यक्रम को लेकर उठा विवाद अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुका है। एक तरफ छात्र संगठन इसे कैंपस की वैचारिक स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्षता से जोड़कर देख रहे हैं, तो दूसरी तरफ RSS समर्थक इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा बता रहे हैं।

फिलहाल इस मुद्दे पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन विवाद ने कैंपस राजनीति और वैचारिक टकराव की बहस को फिर तेज कर दिया है।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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