नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विरोध से कांग्रेस की महिला-विरोधी सोच उजागर: नहीं चाहती कि देश की महिलाएं आगे बढ़ें — सोनू यादव अध्यक्ष भाजयुमो

जांजगीर-चांपा। “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं है, बल्कि भारत की आधी आबादी को उसका वास्तविक अधिकार, सम्मान और राजनीतिक सहभागिता दिलाने वाला ऐतिहासिक कदम है। यह विधेयक देश की माताओं-बहनों को निर्णय प्रक्रिया में बराबरी का स्थान देने की मजबूत आधारशिला है।
दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस पार्टी ने इस विधेयक का विरोध कर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह नहीं चाहती कि देश की महिलाएं आगे बढ़ें, सशक्त बनें और नेतृत्व करें। कांग्रेस की यह मानसिकता महिलाओं को केवल वोट बैंक तक सीमित रखने वाली, उन्हें सत्ता और निर्णय से दूर रखने वाली सोच को उजागर करती है।
आज जब भारत की महिलाएं शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, सेना और राजनीति जैसे हर क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर रही हैं, तब उनके अधिकारों को रोकने का यह प्रयास निंदनीय ही नहीं, बल्कि महिला समाज का खुला अपमान है। कांग्रेस का यह रवैया नारी सशक्तिकरण के प्रति उसके दोहरे चरित्र को सामने लाता है।
देश की जागरूक माताएं और बहनें इस महिला-विरोधी सोच को भली-भांति समझ चुकी हैं। आने वाले समय में महिला शक्ति लोकतांत्रिक तरीके से इसका करारा जवाब देगी। नारी सम्मान, नारी अधिकार और नारी नेतृत्व के इस संघर्ष में देश की महिलाएं किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाली नहीं हैं।



