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धान खरीदी की उलटी गिनती में बड़ा झटका भौतिक सत्यापन में हजारों बोरी धान गायब, निगरानी तंत्र ध्वस्त, कार्रवाई का ठीकरा सिर्फ समितियों पर, जिम्मेदार अफसरों पर चुप्पी क्यों?

सूरजपुर। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी नजदीक आते ही सूरजपुर जिले में प्रशासनिक दावों की सच्चाई सामने आने लगी है। कलेक्टर एस. जयवर्धन के निर्देश पर कराए गए भौतिक सत्यापन में पहले पांच केंद्रों के बाद अब चंदौरा, लटोरी और सलका धान उपार्जन केंद्रों पर हजारों बोरियों की कमी पाई गई है। इन गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि जिला प्रशासन की अधिकृत प्रेस विज्ञप्ति में स्वयं की गई है, जिससे निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्रशासनिक जानकारी के अनुसार विगत दिवस चंदौरा धान उपार्जन केंद्र का सत्यापन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) प्रतापपुर, सीसीबी नोडल अधिकारी, खाद्य निरीक्षक एवं एसडब्लूयूसी स्टाफ की उपस्थिति में किया गया। सत्यापन में 22 स्टैक में कुल 1,52,607 बोरी धान पाया गया, जबकि ऑनलाइन रिकॉर्ड में 1,54,652 बोरी दर्ज थीं। यानी 2,045 बोरी (करीब 818 क्विंटल) धान की कमी उजागर हुई।
इसी तरह लटोरी धान खरीदी केंद्र में किए गए सत्यापन में 10,919 बोरी (करीब 4,367 क्विंटल) धान कम पाया गया। वहीं सलका केंद्र में एसडीएम भैयाथान के नेतृत्व में किए गए सत्यापन में 1,930 क्विंटल धान की कमी सामने आई। गंभीर अनियमितता को देखते हुए एसडीएम भैयाथान ने आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
निगरानी तंत्र कटघरे में
धान खरीदी सत्र की शुरुआत में प्रत्येक सहकारी समिति में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए थे। तहसीलदार एवं एसडीएम स्तर की संयुक्त निगरानी टीम और साप्ताहिक भौतिक सत्यापन की व्यवस्था भी बताई गई थी, लेकिन हकीकत में यह निगरानी कागजों तक ही सीमित रही। करीब एक महीने बाद हुए औचक सत्यापन में लगातार केंद्रों पर कमी मिलना निगरानी तंत्र की विफलता को उजागर करता है।

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जिम्मेदारी तय करने से परहेज क्यों?

सबसे अहम सवाल यह है कि यदि कागजी खरीदी और रिकॉर्ड में गड़बड़ी हुई है, तो
गिरदावरी में तैनात कर्मचारी, नोडल अधिकारी और साप्ताहिक सत्यापन के लिए जिम्मेदार अफसरों की भूमिका की जांच क्यों नहीं की जा रही?
प्रेस विज्ञप्ति में इन जिम्मेदार अधिकारियों पर किसी ठोस कार्रवाई का उल्लेख नहीं होना प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
उठाव में देरी, फिर समितियों पर आरोप

सूत्रों का कहना है कि जिले में समय पर धान उठाव नहीं होने से समितियों पर भंडारण का दबाव बढ़ा। इसके बावजूद गड़बड़ी सामने आते ही पूरी जिम्मेदारी समितियों पर डाल दी गई, जबकि प्रशासनिक लापरवाही पर चुप्पी साध ली गई। यह दोहरी नीति अब सवालों के घेरे में है।

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आखिरी सप्ताह में भरोसे की परीक्षा

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धान खरीदी के अब अंतिम दिन शेष हैं। लगातार सामने आ रही अनियमितताओं से किसानों का भरोसा डगमगा रहा है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन सिर्फ कमी उजागर कर औपचारिकता निभाता है या फिर जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई करता है।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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