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C.G News : छत्तीसगढ़ में 87 लाख टन धान खरीदी! लेकिन तकनीकी-प्रशासनिक समस्याएं बनी बाधा… किसान और विपक्ष उठा रहे सवाल

रायपुर: छत्तीसगढ़ में इस साल धान खरीदी जोरों-शोरों से जारी है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 17.24 लाख टोकन के माध्यम से लगभग 87 लाख टन धान खरीदी जा चुकी है। प्रदेश के 2,739 खरीदी केंद्रों के जरिए किसानों को केंद्र सरकार के समर्थन मूल्य पर धान बेचने का अवसर मिल रहा है। इस वर्ष 27.40 लाख किसानों ने 34.39 लाख हेक्टेयर रकबे में पंजीकरण कराया है, जो पिछले साल की तुलना में 7.5 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही सरकार ने तुहर टोकन ऐप के माध्यम से 24 घंटे टोकन जारी करने की सुविधा शुरू की है, जिससे किसानों को अपनी बारी के लिए लंबे इंतजार से राहत मिली।

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अव्यवस्था और तकनीकी समस्याएं
हालांकि धान खरीदी की यह पहल सराहनीय है, लेकिन किसानों को अभी भी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई ग्रामीण इलाकों में किसानों के पास एंड्रॉयड मोबाइल नहीं होने के कारण वे बार-बार चॉइस सेंटर के चक्कर काटने को मजबूर हैं। पंजीकरण प्रक्रिया में तकनीकी खामियां और कर्मचारियों की हड़ताल भी किसानों की परेशानी बढ़ा रही है। महासमुंद जिले में एक किसान ने धान बेचने की परेशानियों के चलते आत्महत्या का प्रयास किया।

अवैध धान परिवहन पर सख्त कदम
सरकार ने अवैध धान परिवहन और भंडारण रोकने के लिए भी कदम उठाए हैं। अब तक 2,000 से अधिक केस दर्ज किए गए और 1.93 लाख टन अवैध धान जब्त किया गया है। इस कदम को किसानों और कानून के पालन के दृष्टिकोण से सकारात्मक माना जा रहा है।

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विधानसभा में हंगामा और विपक्ष के सवाल
छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विपक्ष ने धान खरीदी की अव्यवस्था और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार जानबूझकर सिस्टम को कमजोर कर रही है और धान खरीदी को निजी हाथों में सौंपने की साजिश कर रही है। कांग्रेस विधायकों ने स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य किए जाने पर पूरे दिन की कार्यवाही का बहिष्कार किया।

सवाल उठता है
सरकार की योजना में ढांचागत सुधार और ऑनलाइन टोकन सुविधा के बावजूद किसानों की परेशानियों का समाधान क्यों नहीं हो पा रहा है? क्या यह तकनीकी और प्रशासनिक अव्यवस्था जानबूझकर बनाई गई है या कर्मचारियों और संसाधनों की कमी इसका कारण है? किसानों की सुरक्षा, आत्महत्या की घटनाओं और पंजीकरण में बाधाओं को देखते हुए सरकार की वास्तविक मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।

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देखा जाए तो, धान खरीदी की प्रक्रिया में सकारात्मक पहल और लाखों किसानों को लाभ पहुंचाने के प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक खामियों के कारण किसानों को अभी भी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सवाल यह है कि क्या सरकार इन समस्याओं को समय रहते हल करेगी और धान खरीदी को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाएगी?

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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