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14 हजार 500 फीट पर वीर बलिदानियों के सम्मान में बना गलवान वॉर मेमोरियल

नई दिल्ली ,08 दिसंबर। लद्दाख की वीर भूमि में, समुद्र तल से 14 हजार 500 फीट की ऊंचाई पर, माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले गलवान घाटी के कठोर वातावरण के बीच भारतीय सैनिकों के शौर्य और सर्वोच्च बलिदान को अमर करने के लिए गलवान वॉर मेमोरियल तैयार किया गया है। यह स्मारक न केवल एक संरचना है, बल्कि भारत के उन सपूतों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान का प्रतीक है जिन्होंने 15 जून 2020 की रात इतिहास रच दिया।

20 बहादुर योद्धाओं को दी गई श्रद्धांजलि

गलवान की इस कठिन घाटी में, भारतीय सेना के 20 बहादुर योद्धाओं ने राष्ट्र की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा सदियों तक भारतीयों के हृदय में अमर रहेगा। उन्हीं वीर सपूतों के शौर्य और पराक्रम को श्रद्धांजलि देने हेतु इस स्मारक का निर्माण किया गया है, ताकि उनकी गाथा देश की आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सके।

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कठिन परिस्थितियों के बावजूद बना भव्य स्मारक

गलवान वॉर मेमोरियल 14 हजार 500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जहां सांस लेना भी चुनौतीपूर्ण है और तापमान बेहद कम रहता है। कठिन प्राकृतिक परिस्थितियों के बावजूद यह भव्य स्मारक तैयार किया गया जो स्वयं भारतीय सेना की दृढ़ता और संकल्प का प्रतीक है।

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स्मारक की खासियत क्या है

स्मारक का डिजाइन एक बड़े त्रिशूल के रूप में तैयार किया गया है। इसके मध्य में शाश्वत ज्योति प्रज्वलित है, जो अमर वीरों के अटूट बलिदान का प्रतीक है। स्मारक की ऊंचाई पर राष्ट्रीय ध्वज लहराता है, जो हर आगंतुक के मन में गर्व की भावना पैदा करता है। चारों ओर गलवान के उन वीरों की कांस्य प्रतिमाएं स्थापित हैं, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

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स्मारक के लिए लाल और विभिन्न रंगों के ग्रेनाइट का उपयोग किया गया है, जो बलिदान और बहादुरी का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस परिसर में एक आधुनिक संग्रहालय और डिजिटल गैलरी भी बनाई गई है, जिसमें-

भारतीय सेना की विरासत।

गलवान के ऐतिहासिक क्षण।

सैन्य तकनीक और ऑपरेशनों की जानकारी बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत की गई है।

वीर जवानों के बारे में ऐसे जानेंगे लोग

रेजांगला की तर्ज पर एक ऑडिटोरियम भी विकसित किया गया है, जहां आगंतुक गलवान की घटनाओं, सैनिकों की वीरगाथाओं और लद्दाख की सामरिक महत्ता के बारे में जान सकेंगे। यह स्मारक न केवल शौर्य की पहचान है, बल्कि वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत एक महत्वपूर्ण परियोजना भी है। इसके माध्यम से

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पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

दूर-दराज के क्षेत्रों से लेकर गलवान तक लोगों की आवाजाही सुलभ होगी।

स्थानीय समुदाय के विकास को नई दिशा मिलेगी।

गलवान वॉर मेमोरियल आने वाले समय में उन सभी भारतीयों के लिए रणभूमि का दर्शन बनेगा जो अपने वीर सपूतों को श्रद्धांजलि देना चाहते हैं। यह स्थल युवाओं में राष्ट्रभक्ति, साहस और दृढ़ संकल्प की भावना को और मजबूत करेगा।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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