जिला मुख्यालय जांजगीर के वाटर एटीएम हुए कबाड़, प्याऊ अब तक खुले नहीं, राहगीर भटकने को मजबूर, स्थानीय नागरिकों ने की जांजगीर-चाँपा विधायक से प्रमुख स्थानों पर प्याऊ खुलवाने की मांग…

जांजगीर-चाँपा। गर्मी की तपिश अब अपने चरम पर है। झुलसाने वाली गर्मी के कारण लोगों की हालत खराब है और उनका जीना बेहाल हो गया है। ऐसे में पानी और छांव की लोगों को जरूरत महसूस हो रही है। जिला मुख्यालय जांजगीर के कचहरी चौक, बीटीआई चौक, कलेक्ट्रेट, न्यायालय, नगर पालिका, बस स्टैंड एवं रेलवे स्टेशन जैसे प्रमुख स्थान पर लोगों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में लोगों को गला तर करने के लिए भटकना पड़ रहा है। इधर, जैसे -जैसे गर्मी बढ़ती जा रही है, वैसे ही कंठ सूखते जा रहे हैं। इधर स्थानीय नागरिकों ने जांजगीर-चाँपा के विधायक ब्यास कश्यप से नगर के प्रमुख स्थानों पर प्याऊ खुलवाने की मांग की है।
गर्मी बढ़ने के साथ ही अब हर पल पानी की मांग बढ़ती जा रही है, लेकिन जांजगीर शहर में एक भी वाटर एटीएम संचालित नहीं हो रहा है। जबकि, नगर के कचहरी चौक सहित कुछ स्थानों पर लगाए गए वाटर फ्रीजर महीनों से खराब होकर बंद पड़े हुए हैं। बता दें कि कचहरी चौक में एक वाटर एटीएम मशीन भी लगाई गई है, लेकिन वह भी बंद पड़ी है और उसे देखने से लग रहा है कि वह सालों से ऐसी ही बन्द होने के कारण जर्जर हो चुकी है। वहां आसपास से आए लोगों से बातचीत करने पर पता चला कि लगभग 3-4 सालों से वह मशीन बन्द है, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से कोई उसकी सुध लेने अब तक नहीं पहुंचा है। इसी तरह की स्थिति जिला पंचायत परिसर और जिला अस्पताल परिसर में भी स्थापित वाटर एटीएम मशीन की है, जो काफ़ी समय से खराब होकर बंद पड़ी हुई है।
पानी के लिए होटलों पर निर्भर हैं यात्री
जिला मुख्यालय के बदहाल बस स्टैंड में पीने के पानी के लिए यात्रियों को सिर्फ एक बिगड़े हुए हैंडपंप से काम चलाना पड़ रहा है। हैंडपंप ने पानी दिया तो ठीक नहीं तो होटल से काम चलाना पड़ता है। होटल संचालक भी नास्ता करने की शर्त पर पीने का पानी देते हैं। कभी तो पीने के पानी के लिए लोगों के बीच विवाद की स्थिति निर्मित हो जाती है। इस सब में सबसे ज्यादा परेशान तो आम यात्री हो रहे हैं, जिसके निदान के लिए यहां प्याऊ घर खोला जाना निहायत जरूरी हो गया है।
यहां अब तक नहीं खोले प्याऊ घर
जिला मुख्यालय जांजगीर में अब तक एक भी ऐसा प्याऊ घर नहीं खुल पाया है, जिससे बाहर से आए लोगों को पीने के पानी के लिए परेशानियों का सामना न करना पड़े। बीते सालों में विभिन्न समाज सेवियों द्वारा कई स्थानों पर प्याऊ घर खोले जाते थे। लेकिन, यहां इस वर्ष अब तक एक भी प्याऊ घर नहीं खुल पाया है। वहीं शासकीय संस्था ने भी प्याऊ घर खोलने की व्यवस्था नहीं की है। सार्वजनिक स्थलों में प्याऊ घर नहीं होने से लोगों के बीच अब पानी के पाउच और बॉटल खरीद कर पीने का ट्रैंड बन गया है।
पानी की समस्या से जूझ रहे राहगीर
गर्मी अब अपने तीखे तेवर दिखाने लगी है। ऐसे में कमजोरी से बचने के लिये पानी अतिआवश्यक है। वहीं राहगीर पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। समाज सेवकों और नगर पालिका ने इस साल अब तक इस दिशा में कोई व्यवस्था नहीं की है, जिसके कारण पानी के लिए राहगीरों को दर-दर भटकना पड़ रहा है। शहर में रेलवे स्टेशन के अंदर पीने के पानी की व्यवस्था है, लेकिन बाहर एक भी प्याऊ नहीं खुलने से बाहरी लोगों को पीने के पानी के लिए स्टेशन के अंदर जाना पड़ता है। प्याऊ घर नहीं खुलने की वजह से लोगों को होटलों पर ही टकटकी लगानी पड़ती है।



