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जटिल सर्जरी…धरती के भगवानों ने महिला को लगा दिए बुजुर्ग के दोनों हाथ, हर कोई कर रहा तारीफ…

नई दिल्ली। फरीदाबाद स्थित अमृता हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने 12 घंटे तक चली जटिल सर्जरी के जरिये एक 38 साल की महिला को 76 साल की बुजुर्ग के दोनों हाथ जोड़ दिए हैं. एम्स ऋष‍िकेश में 38 साल की पीएचडी स्कॉलर ट्व‍िंकल डोगरा को करीब दस साल पहले करंट लगने के कारण अपने दोनों हाथ गंवाने पड़े थे. अपने दोनों हाथ पाकर उन्होंने कहा कि मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे कभी अपने दोनों हाथ वापस मिल सकते हैं. बता दें कि 76 वर्षीय महिला डोनर के अंगदान से सिर्फ हाथ ही नहीं कुल पांच लोगों को नया जीवन मिला है. इस दौरान डॉक्टरों ने डबल-हैंड ट्रांसप्लांट के अलावा किडनी ट्रांसप्लांट, कॉर्नियल ट्रांसप्लांट और लंग ट्रांसप्लांट सहित पांच जटिल प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक अंजाम दिया. इस ऐतिहास‍िक सर्जरी के बाद अमृता हॉस्पिटल उत्तर भारत में डबल-हैंड ट्रांसप्लांट करने वाला पहला हॉस्पिटल बन गया है.

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उत्तराखंड की रहने वाली 38 वर्षीय ट्विंकल डोगरा एम्स ऋषिकेश में पीएचडी स्कॉलर हैं. उन्होंने बिजली के तार की दुर्घटना में अपने हाथ खो दिए थे. डबल-हैंड ट्रांसप्लांट सर्जरी सफल होने के बाद उन्होंने कहा कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि दोबारा सामान्य जीवन भी जी पाऊंगी, लेकिन इस ट्रांसप्लांट ने मुझे दूसरी ज़िंदगी दे दी है. यह ट्रांसप्लांट एक सेना अधिकारी की पत्नी के अंगदान के कारण संभव हुआ, जिनकी मौत ब्रेन हेमरेज के कारण हुई थी. उन्होंने अपनी किडनी, लीवर, कॉर्निया और ऊपरी अंगों को दान किया, जिससे पांच मरीजों को नया जीवन मिला है.

अमृता हॉस्पिटल के प्लास्टिक और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. मोहित शर्मा ने बताया कि यह मल्टी-ऑर्गन ट्रांसप्लांट भारत के मेडिकल इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि है. हैंड ट्रांसप्लांटेशन बहुत जटिल प्रक्रिया है, जिसमें हाई-लेवल इम्युनोसप्रेशन की आवश्यकता होती है. डोनर की उम्र 76 वर्ष थी, लेकिन मेडिकल जांच में उनके अंगों को स्वस्थ पाया गया. इससे यह साबित होता है कि उम्र अंगदान के लिए कोई बाधा नहीं होती. यह सफलता बुजुर्गों को अंगदान के लिए प्रेरित करने वाली है. गौरतलब है कि इस ऐतिहासिक ऑपरेशन में नेफ्रोलॉजी, ओफ्थल्मोलॉजी और क्रिटिकल केयर की चार अलग-अलग सर्जिकल टीमों ने मिलकर काम किया.

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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