छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पा
डंपिंग यार्ड की आग में झुलस रही शांति नगर की सांसें – विरोध और शिकायतें बेअसर, प्रशासन बना मूकदर्शक, मृत जानवरों से लेकर घरों व होटलों का कचरा डंप…

जांजगीर-चांपा। शांति नगर के लोग अब शांति की तलाश में नहीं, बल्कि कचरे से निजात पाने की उम्मीद में हैं। वार्ड-25 के इस क्षेत्र में बीते 15-20 सालों से कचरे का ढेर लगा है, और प्रशासन ने इसे ‘सुलझाने’ की बजाय नाक में दम करने की साजिश में बदला है। मृत जानवरों से लेकर घरों व होटलों का कचरा, सब यहीं फेंका जा रहा है। विरोध के बावजूद हालात जस के तस हैं।
बदबू और धुएं से जीवन हुआ दुश्वार
खाली मैदान में डाले गए कचरे को जब भी साफ करने की बजाय जलाया जाता है, तो पूरा इलाका धुएं और बदबू से भर जाता है। पिछले 10 दिनों से यहां लगी आग ने वार्डवासियों का जीना दुश्वार कर दिया है। बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में कठिनाई हो रही है। संक्रमण और बीमारियों का खतरा हर दिन बढ़ता जा रहा है।
बच्चों के खेलने का मैदान भी छीना
शांति नगर के बच्चों के पास खेलने के लिए कोई अन्य मैदान नहीं है। यह जगह भी कचरे के ढेर में तब्दील हो चुकी है। स्थानीय लोग कई बार प्रशासन और नगर पालिका अध्यक्ष को शिकायत दे चुके हैं, लेकिन समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
नेताओं के लिए साफ, जनता के लिए गंदगी
वार्डवासियों का कहना है कि जब भी कोई बड़ा नेता दौरे पर आता है, तो खाना पूर्ति के लिए इस मैदान की सफाई कर दी जाती है। लेकिन आम जनता की तकलीफों को अनदेखा किया जा रहा है।
कलेक्टर से भी शिकायत बेअसर
इस गंभीर समस्या से कलेक्टर को भी अवगत कराया गया है। लेकिन प्रशासन की सुस्ती से वार्डवासियों का धैर्य टूटता जा रहा है। उनका कहना है कि जब तक कचरे का स्थायी समाधान नहीं होगा, तब तक उनका जीवन नरक बना रहेगा।
प्रशासन से सवाल:
कचरे के स्थायी निपटान के लिए कदम कब उठाए जाएंगे?
बच्चों और नागरिकों के लिए स्वच्छ वातावरण कब सुनिश्चित होगा?
जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करने की जिम्मेदारी कौन लेगा?



