Reg No. CG-06-0026209
WhatsApp Image 2026-06-28 at 09.42.10
IMG-20250604-WA0015-1
IMG-20250604-WA0014-1
WhatsApp Image 2026-06-25 at 17.56.31 (1)
WhatsApp Image 2026-06-25 at 17.55.51 (1)
Uncategorized

बाघ की मौत पर अटकलों का दौर खत्म,  अंदरूनी चोंट बाद संक्रमण से हुई मौत…

बैकुंठपुर-कोरिया। सप्ताह पूर्व कोरिया वन मंडल के गरनई बीट कटकवार में मृत अवस्था में मिले बाघ की मौत की बिसरा जांच रिपोर्ट आने के बाद जहरखुरानी की आशंका खत्म हो गई है। मृत बाघ के पोस्ट मार्टम में मिली शुरुआती जानकारी में मृत बाघ की तीन पसलियां टूटी हुई थीं। साथ ही बाघ के पेट में शिकार के अवशेष भी नहीं मिले थे। बाघ भूखा भी था। जिन कुछ कारणों से ये कहा जा सकता है की बाघ किसी ताकतवर जानवर से शिकार के दौरान चोटिल हुआ था या फिर वनों के विहंगम भौगोलिक स्थानों से गिरने से उसे गंभीर अंदरूनी चोंट आई होंगी जिस बीमार चल रहे बाघ की असहनीय पीड़ा और शिकार करने में असमर्थता की वजह से बाघ की मौत हुई होगी। हालांकि अभी एक और रिपोर्ट आनी बाकी है और उसमें बाघ के मौत के कारणों का वास्तविक खुलासा भी होगा। परंतु रिपोर्ट में यह भी तय है की खुलासे या जानकारी भी इन्हीं वजहों को दर्शाने का प्रमाण मात्र ही होगा और ऊपर बताए गए चोट और उससे बने संक्रमण ही बाघ की मौत की वजह हो सकती है।

शिकार के दौरान संघर्ष से बाघ जैसे प्राणी कैसे होते हैं घायल

बाघ और शेर सहित बड़ी प्रजाति की बिल्लियां जिनका मुख्य तौर पर हिरण, बारहसिंगा, वनभैंसा, नीलगाय, जंगली सुकर, कोटरी, सहित पालतू गाय बैल और भैंसे एकमात्र भोजन के स्तोत्र होते हैं। जिनमें हिरण बारहसिंगा कोटरी और चीतल इनका आसान शिकार होते हैं। परंतु बाघ शेर जैसे खूंखार जानवर जब वनभैंसा जंगली सुकर और पालतू बैल और भैंसों का शिकार करते हैं तो दोनों तरफ से खूनी संघर्ष होता है एक तरफ जान बचाने के लिए संघर्ष तो दूसरी ओर शिकार की जद्दोजहद और फिर इस प्रकार के जानवर और मवेशियों का झुंड में होना भी बाघ और शेर पर हमले की वजह बनती है। बाघ जैसे वन्य प्राणी जब झुंड में रहने वाले वनभैंसा और पालतू भैंसों पर हमला करते हैं तो उनमें भगदड़ होती है और खुद पर हमला होते देख ये भी आक्रोशित और आमने सामने की स्थिति में हमलावर हो जाते हैं और फिर कई तरफ से जानलेवा हमले होते हैं जिसमें कभी कभी बाघ को भी गंभीर चोटें आ जाती हैं और उसे बिना शिकार ही उसे भागना पड़ता है। कभी कभी बीहड़ों में भी ऐसा होने से बाघ व शेर घायल व बीमार हो जाते हैं ज्यादा उछल कूद और भाग दौड़ की स्थिति नहीं रहती साथ ही उनकी पहुंच की सीमा में छोटे जंगली जीवों का आसान शिकार का अभाव भी बाघ के लिए लाचारी बन जाती है। ऐसी स्थिति में बाघ द्वारा हलचल और पशुहानी भी नहीं की जाती जिस कारण विभाग को भी बाघ और शेर का वनों में विचरण का सही लोकेशन नहीं मिलता पाता और कुछ ही दिनों में ये प्राणी इलाज व देखरेख के अभाव में बीहड़ों में ही दम तोड़ देते हैं। मृत मिले बाघ के शव के पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में मिले कारणों और लगातार जंगलों की पड़ताल सहित सूत्रों के आधार पर बेशक बाघ की मौत की वजह ताकतवर जानवर से भिड़ने से लगी चोंट या फिर भाग दौड़ के दौरान ऊंचे स्थान से गिरने की वजह से हुई होगी ऐसा कहा जा सकता है।

See also  जांजगीर-चांपा जिले में आठवीं तक की मान्यता लेकर नियम विरुद्ध 12वीं तक की कक्षाओं का संचालन कर रहे कई स्कूल संचालक, निजी स्कूल संचालकों की सेटिंग का खेल खत्म करने में जिला शिक्षा अधिकारी नाकाम...

प्रभारी रेंजर्स द्वारा रिजर्व फॉरेस्ट में संदेहास्पद तत्वों की इंट्री बाघों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा

Advertisment

बीते दो वर्षों से गुरुघासीदास राष्ट्रीय उद्यान के वन क्षेत्रों में जिस तरह बाघ जैसे प्राणियों की सुरक्षा में लगातार बड़ी चूक देखी जा रही है। और पहले बाघ की मौत रामगढ़ परिक्षेत्र में मवेशी से जहरखुरानी से हुई और उसके कुछ महीने बाद इसी राष्ट्रीय उद्यान के सीमावर्ती क्षेत्र से बाघ के अंगों के कुछ तस्कर भी रंगे हाथ पकड़े गए थे। और फिर तीसरे बाघ की 8 नवंबर 2024 को मिले शव से इतना तो तय है की राष्ट्रीय उद्यान के अफसर और जमीनी अमलो को बाघ की सुरक्षा का तनिक मात्र भी परवाह नहीं है। डेढ़ साल पहले बाघ की अंग तस्करी और जहरखुरानी का मामला जिस तरह दूसरों पर ठीकरा फोड़ते हुए खुद की लापरवाही पर पर्दा डाला गया था। साथ ही प्रदेश की पूर्व कांग्रेस सरकार के स्थानीय नेताओं की सरपरस्ती में रामगढ़, रेहंड और सोनहत पार्क परिक्षेत्र के दो स्टार प्रभारी रेंजर बाघ जैसे प्राणी के मौत के लापरवाह होने के बाद भी सुरक्षित बचे रहे और पार्क क्षेत्र में बेरोक टोंक संदेही तत्वों के लिए रेस्ट हाउस, वॉच टॉवर और प्रतिबंधित क्षेत्रों में खुशामत और आवभगत लगातार जारी रही उससे राष्ट्रीय उद्यान की संवेदनशीलता से खिलवाड़ तो किया ही गया साथ ही वन्य जीवों के संसाधनों, वनों की सुरक्षा सहित भूमि व जल संरक्षण बाबत विभिन्न प्रकार के थोक के भाव निर्माण कार्यों में जमकर भ्रष्टाचार किया गया है। दो प्रभारी रेंजर तो अपने मंसूबों को पूरा कर चलते बने पर सूत्रों की कहें तो एक दो स्टार प्रभारी रेंजर पर अभी भी कृपा बरस रही है और लगातार अपने कांग्रेसी मित्र नेताओं को सीढ़ी बनाकर वर्तमान सत्ता पक्ष के नेताओं के संरक्षण में सुरक्षित बने
रहने का प्रयास कर रहे हैं। अवगत करा दें की कांग्रेसी नेताओं की मित्रमंडली को पूरे कार्यकाल पूरा फायदा इनके द्वारा इसलिए पहुंचाया गया क्योंकि खुद भी बड़े कांग्रेस समर्थित ब्यक्ति हैं और उन्हीं की बदौलत पार्क परिक्षेत्र में लंबा गोलमाल करने का अवसर मिला था। जिन मजदूरों को गुरुघासीदास राष्ट्रीय उद्यान में कार्य के नाम मजदूरी भुगतान किया जाता था वो मजदूर कांग्रेसियों के यहां धान रोपा लगाने सरकारी गाड़ी में सैकड़ों की संख्या में भेजे जाते थे। करतूतों के लिए आज भी चर्चित पार्क में पदस्थ प्रभारी रेंजर जो बीते चार पांच वर्ष पहले एक जर्जर मोटर सायकल में जंगलों की खाक छाना करता था आज महज तीन वर्षों में कई महंगे वाहन, रिश्तेदारों के नाम बड़ी संपत्तिया, कई जेसीबी मशीनों सहित बीच शहर में बड़ा मकान और कई बेनामी संपत्ति के मालिक बन चुके है और विडंबना तो अब भी यही बनी हुई है की अब भी ऐसे नामचीन लोगों के हाथों में आति संवेदनशील गुरुघासीदास राष्ट्रीय उद्यान के प्रभारी रेंज अफसर की कमान बनी हुई है जिसका एक मात्र उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ वनों में ठेकेदारी और भ्रष्टाचार ही है।

See also  फसलों की सुरक्षा के लिए गांव-गांव में चल रहा रोका-छेका अभियान ग्रामीणों की सहभागिता के साथ गौठान समितियों की बैठक...

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!