छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पा
दुष्कर्म कर, जीवन बर्बाद होने के डर से हत्या करने वाले आरोपियों को मिली आजीवन कारावास की सजा, माननीय अनिल कुमार बारा अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) जांजगीर का फैसला…

जांजगीर-चांपा। दुष्कर्म कर जीवन बर्बाद होने के डर से हत्या करने वाले आरोपियों को न्यायालय द्वारा भादवि की धारा 302, 34 के अपराध के लिए आजीवन कारावास के दण्ड एवं 500-500 रूपये के अर्थ दण्ड तथा साक्ष्य छिपाने के आरोप में धारा 201 के अपराध के लिए 1-1 वर्ष सश्रम कारावास 100-100 रुपये के अर्थदण्ड से दंडित किया गया है।
लोक अभियोजक राजेश पाण्डेय के अनुसार, थाना अकलतरा के मर्ग क्रमांक 91/21 धारा 171 जा. फौ. की जांच पर अज्ञात मृतिका की पहचान पीडिता के रूप में होने एवं शव के पीएम पर अज्ञात आरोपियो द्वारा मारकर हत्या कारित करना पाये जाने से धारा 302 भादसं का अपराध पंजीबद्ध कर प्रकरण विवेचना में लिया गया। प्रकरण के संदेही चंद्रमणी ने अपना जुर्म स्वीकार करते हुए बताया कि मृतिका के घर में पूर्व से ही आरोपी चंद्रमणी का आना-जाना था एवं वह मृतिका के पिता से भी परिचित था। प्रकरण के संदेही चद्रमणी ने अपना जुर्म स्वीकार करते हुए बताया कि मृतिका के घर चंद्रमणी के दोस्त सुरेन्द एवं शिवदास भी चंद्रमणी के साथ आना- जाना करते थे। 9 अक्टूबर 2021 को आरोपीगण ने मौज-मस्ती की योजना बनाई थी। मृतिका से पूर्व परिचित होने के कारण आरोपी चंद्रमणी ने अपने मित्र सुरेन्द्र श्रीवास से शिवदास को बुलवाया और मोटर सायकल पर पीडिता को बैठाकर सीसीआई के बंद पड़े मांईस के पीपल पेड के पास पहुंचकर आरोपी चंद्रमणी एवं अन्य अभियुक्तगण ने मृतिका के साथ दुष्कर्म किया तथा तीनों आरोपीगण, मृतिका के साथ रात्रि लगभग 9 बजे तक वही रूके थे। जब रात्रि में मृतिका ने अपने बच्चों की तबियत खराब होने की बात कहते हुए आरोपीगण को उसके घर छोड़ने कहा तो आरोपीगण ने उसे रूकने की जिद की थी, उक्त बात को लेकर आरोपीगण एवं मृतिका के बीच हाथापाई होने लगी। मृतिका द्वारा आरोपीगण के विरूद्ध थाना में रिपोर्ट करूंगी बोलने पर आरोपीगण द्वारा बदनाम होने एवं बर्बाद होने के डर से एक राय होकर मृतिका को उसके ब्लाउज से गला दबाकर एवं नुकीले पत्थर से मारकर उसकी हत्या कर दिया तथा लाश को छुपाने के उद्देश्य से अपने घर से बोरी लाकर उसमें भरकर आरोपी चंद्रमणी एवं सुरेन्द्र द्वारा मृतिका के शव को तरौद के बड़े नहर के पानी में फेक दिया गया। उक्त नहर के अंदर से निकालकर पहचान कार्यवाही कर शव को उसके परिजनाें द्वारा पीडिता के रूप में पहचान किया गया। उक्त घटना के संबंध में अज्ञात आरोपी विरुद्ध धारा 302 का अपराध पंजीबद्ध किया गया। विवेचना के दौरान आरोपीगण के विरूद्ध धारा सदर का अपराध घटित करना साक्ष्य पाये जाने से उनके विरुद्ध धारा 376 डी, 201,34 भादंस पृथक से जोड़ी गई। तत्पश्चात विवेचना पूर्ण कर अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।
अभियोजन ने तर्क प्रस्तुत किया कि जिस प्रकार से आरोपीगण द्वारा दुष्कर्म जैसी घिनौनी हरकत कर जीवन बर्बाद होने के डर से उसकी हत्या कर नहर में फ़ेंका है, वह हत्या ही दर्दनाक घटना है। अतः आरोपीगण को कठोर से कठोर दण्ड दिया जावे। इस प्रकार संपूर्ण अभियोजन साक्षियों का कथानक लिये जाने के पश्चात अभियोजन साक्षियों के न्यायालयीन कथनों के विश्लेषण कर अनिल कुमार बारा सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) जाजगीर द्वारा आरोपीगण चंद्रमणी वैष्णव उर्फ करण पिता कुष्ण कुमार वैष्णव उम्र 37 वर्ष एवं सुरेन्द्र श्रीवास पिता स्व. जगतराम श्रीवास उम्र 30 वर्ष दोनों निवासी ग्राम तरौद थाना अकलतरा जिला जांजगीर-चांपा को भादवि की धारा 302, 34 के अपराध के लिए आजीवन कारावास के कारावासीय दंण्डादेश एवं 500-500 रूपये के अर्थदण्ड तथा साक्ष्य छिपाने के आरोप में धारा 201 के अपराध के लिए 1-1 वर्ष के सश्रम कारावास व 100-100 रूपये के अर्थदण्ड से दडित किया गया है। अर्थदण्ड की राशि अदा नहीं करने पर आरोपीगण को पृथक-पृथक 3-3 माह के अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा दी गई है। उक्त प्रकरण में अभियोजन की ओर से राजेश पाण्डेय, लोक
अभियोजक ने पैरवी की।



