ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल में द्वितीय चरण के ओरिएंटेशन कक्षा में विश्व स्वास्थ्य संगठन के जीवन जीने के कौशलो का विषयावार प्रयोग पर सेमीनार का आयोजन…

ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल में द्वितीय चरण के ओरिएंटेशन कक्षा में विश्व स्वास्थ्य संगठन के जीवन जीने के कौशलो का विषयावार प्रयोग पर सेमीनार का आयोजन
जांजगीर-चांपा। ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल, बनारी, जांजगीर में स्कूल के डायरेक्टर आलोक अग्रवाल व प्राचार्या सोनाली सिंह के निर्देशन में द्वितीय चरण के ओरिएंटेशन कक्षा में विश्व स्वास्थ्य संगठन के जीवन जीने के कौशलो का विषयावार प्रयोग पर सेमीनार आयोजित हुआ। इस आयोजन का नेतृत्व मिनी मोल थाॅमस के द्वारा किया गया। कार्यक्रम के शुरूआत में उन्होंने शिक्षको को उनके विषयानुसार अंग्रेजी, हिन्दी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान समूह में विभाजित किया।
सेमीनार के द्वितीय दिवस में हिन्दी शिक्षिकाओं आशा राठौर, हन्ना बंजारे, विजयलता राठौर और सरिता प्रधान ने अपनी प्रस्तुति दी। इस कड़ी में सर्वप्रथम आशा राठौर ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के जीवन कौशलों पर चर्चा करते हुए हिन्दी विषय में इन कौशलो का प्रयोग के बारे में बताया। उन्होने कहा कि हिन्दी भाषा में कहानी, कविता, नाटक, पत्र, निबंध, वाद-विवाद आदि विधाओं के माध्यम से जीवन के सभी कौशलों को छात्रो में विकसित किया जा सकता है। उन्होने महत्वपूर्ण सोच, रचनात्मक सोच, तनाव से जुझना और भावनाओ पर नियंत्रण आदि जीवन कौशलो पर चर्चा करते हुए हिन्दी विषय में इन कौशलो का प्रयोग बताया। उन्होने कहा कि अपने जीवन को सरल और सहज बनाना ही जीवन कौशल है और शि़क्षक ही छात्रो मे यह कौशल विकसित कर सकते हैं। तत्पश्चात् हन्ना बंजारे ने जीवन कौशल के दो विषय-पारस्परिक संबंध एवं प्रभावी संचार कौशल के बारे में बताते हुए कहा कि इन कौशलो के माध्यम से हिन्दी विषय को और अधिक प्रभावशाली ढंग से कक्षा में विद्यार्थीयों के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता हैं। इसके माध्यम से विद्यार्थियों के व्यवहार में परिवर्तन एवं विकास कर सकते है। आगे उन्होने कहा कि शिक्षक एक कुम्हार होता और बच्चे गीली मिट्टी की तरह होते हैं, शिक्षक चाहें तो उसे एक सुन्दर, सुसज्जित घड़े का रुप दे सकता है और यदि चाहे तो बेडौल घडे़ का भी रुप दे सकता है। शिक्षक को अपने पद की गरिमा को समझते हुए अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाना चाहिए। तत्पश्चात् विजयलता राठौर द्वारा समस्या समाधान व निर्णय लेना जीवन कौशलो के बारे में विचार प्रस्तुत किया गया। उन्होंने बताया कि यह वह तरीका है जिनके द्वारा अंतिम लक्ष्य को प्राप्त करने में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिये समाधान विकसित किये जाते है। अर्थात् ये कौशल अपनी व दूसरो की परेशानियों का हल ढूढ़ने में मद्द करते है। इस कौशल में सही निर्णय करना ही सबसे सही माना है, क्योंकि व्यक्ति जब स्वयं निर्णय लेता है और उस निर्णय पर काम करता है,तो उसमे साहस और आत्मविश्वास जैसी भावनाओं का निर्माण होता है। तद्पश्चात् सरिता प्रधान ने जीवन कौशलो में से सबसे महत्वपूर्ण कौशल आत्म जागरूकता पर चर्चा करते हुए बताया कि आत्म जागरूकता अर्थ है स्वयं जागरूक होना न की किसी अन्य को देखकर। एक कहानी के माध्यम से आत्म जागरूकता कौशल में किसी भी प्रकार से झिझक का न होना एवं अपना परिचय देते हुए पूर्णरूप से आत्मनिर्भर रहना बताया।



