सरदार वल्लभ भाई पटेल उद्यान के सौंदर्यीकरण पर ‘भगवान‘ का ध्यान नहीं, जिम्मेदारों की लापरवाही से शाम ढलते ही अंधरे की आगोश में समा जाता है उद्यान…

जांजगीर-चांपा। जिला मुख्यालय जांजगीर के सरदार वल्लभ भाई पटेल उद्यान के सौंदर्यीकरण पर ‘भगवान‘ का ध्यान नहीं है। मौजूदा हालात ऐसे हैं कि नगर पालिका परिषद जांजगीर-नैला के अध्यक्ष एवं अन्य जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण शाम ढलते ही यह उद्यान अंधेरे की आगोश में समा जाता है। वहीं इस उद्यान से रौनक पूरी तरह से गायब हो चुकी है। उद्यान के अधिकांश झूले टूट गए हैं और पेड़ पौधे मुरझा गए हैं। कई जगह पर फुटपाथ धंस गई है। पेड़ों के नीचे बनाए गए अधिकतर चबूतरों के टाइल्स टूटकर गिर चुके हैं।
गौरतलब है कि जिला मुख्यालय जांजगीर स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल उद्यान अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। मगर, इसकी बदहाली नगर पालिका परिषद जांजगीर-नैला के अध्यक्ष भगवान दास गढ़ेवाल एवं अन्य जिम्मेदारों को नजर ही नहीं आ रही है, तभी शहर के बाकी उद्यानों को संवारने के लिए जहां लाखों रूपए खर्च किए जा रहे हैं तो वहीं सरदार वल्लभ भाई पटेल उद्यान को उसकी बदहाली पर छोड़ दिया गया है। खास बात यह है कि नगर पालिका परिषद जांजगीर-नैला के अध्यक्ष भगवान दास गढ़ेवाल का पूरा ध्यान केवल बीडीएम गार्डन को ही संवारने में है। बीडीएम गार्डन का कई बार कायाकल्प किया जा चुका है। मगर, सरदार वल्लभ भाई पटेल उद्यान की ओर ध्यान ही नहीं दिया जा रहा है।
गायब हो गई है उद्यान की रौनक
चार साल पहले जब तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस उद्यान परिसर में सरदार पटेल की प्रतिमा का अनावरण किया था, तब लोगों को ऐसा लगा था कि अब इस उद्यान की तस्वीर बदलेगी और सुविधाओं का विस्तार होगा मगर, नगर पालिका द्वारा उद्यान के सौंदर्यीकरण की तरफ ध्यान नहीं दिए जाने से अब उजाड़ होता जा रहा है और यहां की रौनक गायब हो गई है। पटेल उद्यान में कई जगह पर फुटपाथ धंस गई है। पेड़ों के नीचे बनाए गए अधिकतर चबूतरों का टाइल्स टूटकर गिर चुके हैं। सरदार पटेल की पुरानी प्रतिमा धूल खा रही है और उनके नाम पर बना उद्यान भी उजड़ गया है।
मेंटनेंस के नाम पर लाखों का वारा-न्यारा
सरदार पटेल उद्यान को जब बनाया गया तो यहां की सुंदरता देखते बनती थी। यहां लगाए गए वाटर फाल, रंगबिरंगी लाइट और फौव्वारा इस उद्यान की सुंदरता पर चार चांद लगाते थे। शहरवासियों के घूमने-फिरने के लिए पटेल उद्यान शहर का पसंदीदा स्थान था मगर, समय के साथ इसकी सुंदरता पर ग्रहण लगता गया। वाटर फाल और रंग-बिरंगे लाइट गायब हो गए। फौव्वारों की फुहारें बंद हो गई। बीच-बीच में फौव्वारा और वाटर फाल शुरु कराने मेंटनेंस के नाम पर लाखों रूपए का वारा-न्यारा हुआ, मगर चंद दिनों में ही हालात पहले जैसे हो गए।



